फीस बढ़ोतरी विवाद: अदालत ने डीपीएस द्वारका से निष्कासित 25 छात्रों को पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी

फीस बढ़ोतरी विवाद: अदालत ने डीपीएस द्वारका से निष्कासित 25 छात्रों को पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी

फीस बढ़ोतरी विवाद: अदालत ने डीपीएस द्वारका से निष्कासित 25 छात्रों को पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी
Modified Date: April 6, 2026 / 08:54 pm IST
Published Date: April 6, 2026 8:54 pm IST

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने फीस जमा न करने पर दिल्ली पब्लिक स्कूल-द्वारका से निकाले गए 25 छात्रों को मंगलवार से कक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दे दी। इसने कहा कि अगर माता-पिता 17 अप्रैल तक बकाया राशि का 50 प्रतिशत भुगतान कर देते हैं, तो स्कूल के फ़ैसले को लागू नहीं किया जाएगा।

अदालत ने डीपीएस-द्वारका के कई छात्रों की अवमानना ​​याचिका पर सोमवार को यह आदेश पारित किया।

आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने उच्च न्यायालय के 16 मई, 2025 के उस आदेश का उल्लंघन किया, जो बढ़ी हुई फीस का भुगतान न करने पर छात्रों को भेदभाव और उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करता था।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा, ‘‘यह निर्देश दिया जाता है कि, बिना किसी पूर्वाग्रह के, माता-पिता 16 मई, 2025 के आदेश के अनुसार बकाया फीस का 50 प्रतिशत हिस्सा 17 अप्रैल तक जमा करा दें। इसके तुरंत बाद, बहाली आदेश जारी कर दिया जाएगा। बच्चों को कल से स्कूल आने की अनुमति होगी।’’

स्कूल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि प्रबंधन ने उच्च न्यायालय के पिछले आदेश के अनुसार, 2025-2026 की बकाया फीस न चुकाने को लेकर छात्रों को ‘कारण बताओ नोटिस’ देने के बाद कार्रवाई की, और उनके जवाब संतोषजनक नहीं थे।

हालाँकि, अदालत ने स्कूल के रवैये पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि उसे इस मामले में पहले दिए गए आदेशों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी की, ‘‘ऐसा नहीं हो सकता कि हर साल हम वही प्रक्रिया दोहराते रहें। एक बार आदेश जारी हो जाने पर, आपको उसका अक्षरश: पालन करना होता है… आपके स्कूल की ओर से यह उचित नहीं है। बिल्कुल भी उचित नहीं… हर साल, वही मज़ाक। वही प्रक्रिया।’’

अदालत ने कहा, ‘‘अपने चेयरमैन को यहाँ बुलाओ। यह क्या है? हर साल वही तमाशा।’’

सुनवाई के दौरान, अदालत ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय से स्कूल के इस दावे पर भी सवाल किया कि उसने 2015-2016 से उसके संशोधित फीस ढांचे को मंज़ूरी नहीं दी है।

अदालत ने सरकारी वकील से पूछा, ‘‘स्कूल 2015-2016 की ही दर पर कैसे काम कर रहा है? आपने तो किसी को मंज़ूरी ही नहीं दी है’’

इसने कहा, ‘‘आपको शिक्षा के स्तर को बनाए रखना होगा; हर बच्चा नयी से नयी प्रौद्योगिकी चाहता है। आप सातवें केंद्रीय वेतन आयोग पर ज़ोर दे रहे हैं। आठवां वेतन आयोग आने वाला है। आप फीस बढ़ाने की इजाज़त नहीं देते। स्कूल कैसे चलेगा? इन सबकी जड़ आप ही हैं।’’

अदालत ने अवमानना ​​याचिका पर स्कूल के प्रधानाचार्य, प्रबंध समिति के चेयरमैन और शिक्षा विभाग के निदेशक को नोटिस जारी किया, तथा सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख निर्धारित कर दी।

इसने यह भी निर्देश दिया कि अवमानना ​​मामले में केवल उन्हीं छात्रों को याचिकाकर्ता बनाया जाए, जिन्हें निष्कासित किया गया था।

उच्च न्यायालय की एक समन्वय पीठ ने 16 मई, 2025 को फीस बढ़ोतरी के विवाद के बीच 100 से अधिक अभिभावकों को निर्देश दिया कि वे शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए बढ़ाई गई फीस का 50 प्रतिशत जमा करें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके बच्चे डीपीएस-द्वारका में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

याचिका में कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में, स्कूल ने बिना मंज़ूरी वाली फीस वसूलने के लिए अभिभावकों पर दबाव डाला और ज़बरदस्ती के तरीके अपनाए; जबकि माता-पिता ने इस शुल्क का भुगतान करने से इनकार कर दिया।

इसमें कहा गया कि बिना मंजूरी वाले शुल्क का भुगतान न करने के कारण बच्चों को प्रताड़ित किया गया।

अभिभावकों के वकील ने कहा था कि स्कूल ने फीस में हर महीने 7,000 रुपये की बढ़ोतरी कर दी, और अब इसमें हर महीने 9,000 रुपये की वृद्धि कर दी है।

याचिका में डीपीएस द्वारका पर भूमि आवंटन संबंधी नियमों के घोर उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है, और यह दावा किया गया है कि दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेशों का पालन नहीं किया गया।

भाषा नेत्रपाल माधव

माधव


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