चेन्नई, 10 जनवरी (भाषा) भारतीय फिल्म उद्योग की कई प्रमुख हस्तियां अभिनेता-नेता विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के रवैये के खिलाफ एकजुट हो गई हैं। फिल्मकार राम गोपाल वर्मा ने बोर्ड को ‘‘पुराना’’ करार दिया है, जबकि अभिनेता शिवकार्तिकेयन ने पोंगल के दौरान फिल्मों की रिलीज पर पड़े असर की ओर ध्यान दिलाया है।
जातिगत उत्पीड़न जैसे विषयों को अपनी फिल्मों में उठाने वाले प्रमुख तमिल फिल्म निर्देशक मारी सेल्वराज भी शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस विरोध में शामिल हो गए।
उन्होंने साथी रचनाकारों से ऐसे हस्तक्षेपों के खिलाफ ‘‘जोरदार आवाज उठाने’’ की अपील की, ताकि कलात्मक अभिव्यक्ति को लेकर फैल रहे ‘‘डर’’ को पीछे धकेला जा सके। उन्होंने इस पूरे विवाद को इस बात की कसौटी बताया कि सरकार राजनीतिक सिनेमा के साथ किस तरह पेश आता है।
मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के तुरंत बाद शुक्रवार शाम को राम गोपाल वर्मा ने ‘एक्स’ पर एक लंबे पोस्ट में कहा कि यह मानना ‘‘मूर्खता’’ है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) आज भी प्रासंगिक है, जबकि बच्चे इंटरनेट पर हिंसक सामग्री तक बेरोकटोक पहुंच बना सकते हैं। उन्होंने फिल्म उद्योग को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ‘‘बोर्ड की प्रासंगिकता पर बहस करने में आलस्य’’ के कारण ही इसे बनाए रखा जा रहा है।
नौ जनवरी को ‘पराशक्ति’ को प्रमाणपत्र मिलने के बाद मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत में अभिनेता शिवकार्तिकेयन ने कहा कि जब ‘जन नायकन’ और उनकी अपनी फिल्म दोनों ही प्रमाणन की अड़चनों में फंस गईं, तो उन्हें काफी निराशा हुई।
यह स्वीकार करते हुए कि सेंसर बोर्ड के अपने नियम और मापदंड होते हैं, शिवकार्तिकेयन ने कहा कि इसके बावजूद रिलीज को लेकर बनी अनिश्चितता से निर्माता, थिएटर और पूरी मूल्य श्रृंखला में जुड़े कर्मचारी प्रभावित होते हैं।
‘पराशक्ति’ को प्रमाणपत्र दिलाने के लिए किए गए बदलावों पर अभिनेता ने कहा कि फिल्म के मूल स्वरूप को प्रभावित किए बिना इन बदलावों को लागू करना एक चुनौती था।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह समझने का समय ही नहीं मिला कि उन्होंने ये बदलाव क्यों सुझाए। बदलाव दोपहर में आए, जिसके बाद हमें उन्हें लागू करना पड़ा और फिल्म को ‘क्यूब’ पर अपलोड करना पड़ा।”
इस बीच, ‘जन नायकन’ का समर्थन कर रही केवीएन प्रोडक्शंस के वेंकट के. नारायण ने एक वीडियो पोस्ट में बताया कि किस तरह शुरुआती मंजूरी को एक शिकायत के आधार पर पलट दिया गया, जिसके बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने फिल्म को प्रमाणपत्र देने का आदेश दिया, लेकिन अब उस पर रोक लग गई है।
भाषा गोला दिलीप
दिलीप