हरिद्वार, चार मार्च (भाषा) अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमले के बाद जारी युद्ध के कारण खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय खौफ के साये में जी रहे हैं जबकि यहां देश में उनके परिवार उनकी सलामती को लेकर फिक्रमंद हैं और उनकी जल्द वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं जिससे वहां रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ा है और वे घरों में रहने को मजबूर हैं।
संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में रहने वाले हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र के शाहरूख ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ईरान के हमलों के बाद पिछले पांच दिनों से दुबई के कुछ इलाकों में हालात ज्यादा ख़राब हैं, हालांकि मरीना, शारजाह, जबेल अली क्षेत्रों में इक्का दुक्का हमले हो रहे हैं।
एक बहुरारष्ट्रीय कंपनी हिमांको स्टील में काम करने वाले शाहरूख ने बताया कि वहां की सरकार नें सभी को घरों में ही रहने का आदेश दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी कंपनी में भी पांच दिन से काम बंद है। मंगलवार से सीमित संख्या में हवाई सेवाएं व कुछ आवश्यक सेवाएं शुरू की गई हैं।’’
शाहरुख़ ने बताया कि उनकी सोसायटी में 100 से अधिक भारतीय हैं और सभी जल्द हालात सुधरने की दुआ कर रहे हैं।
कुवैत के शबाल अहमद इलाके में रहने ज्वालापुर क्षेत्र के ही सराय निवासी रिहान ने फोन पर बताया कि कुछ मिसाइलें कुवैत के शहरी इलाके के ऊपर से गुजरती दिखाई दी थीं, और एक मिसाइल ने शहर से कुछ किलोमीटर दूर अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया था।
कुवैत में एक शेख के पास घरेलू चालक के रूप में कार्य करने वाले रिहान ने बताया, ‘‘जब धमाका हुआ, उस समय मैं उस जगह से कुछ ही दूर अपनी कार से गुजर रहा था। जिस जगह मिसाइल गिरी, वहां काला धुआं उठने लगा। मिसाइल के गिरने के बाद शहर में तेज आवाज में सायरन बजने लगे।’’
रिहान ने दावा किया कि चार दिन पहले तक ईरान की और से आने वाली मिसाइलें आसमान में आती साफ दिखाई देती थीं लेकिन अब जो मिसाइल आ रही हैं, वे इतनी तेज गति से आ रही हैं कि पलक झपकते ही अपने लक्ष्य को निशाना बना रही हैं।
रिहान ने कहा, ‘‘कुवैत में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है और लोग दहशत में हैं।’’
वह रोज फोन करके घर वालों को अपने सुरक्षित होने की जानकारी देते हैं जिससे उन्हें चिंता न हो लेकिन परिजन हालात सुधरते ही उन्हें भारत लौट आने की सलाह दे रहे हैं।
ज्वालापुर में रिहान की मां शहनाज ने कहा कि जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, उन्हें अपने बेटे की चिंता लगी रहती है।
उन्होंने कहा, ‘‘वैसे तो बेटे से लगभग रोज बात हो जाती है मगर जब वहां के हालात बिगड़ने की खबरें मिलती हैं तो दिल बैठने लगता है। बेटे की सलामती की फिक्र खाने लगती है।’’
भाषा सं दीप्ति
शफीक
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