पश्चिम एशिया मामले पर ब्रिक्स का साझा रुख तय करने में हो रही मुश्किल: भारत

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पश्चिम एशिया मामले पर ब्रिक्स का साझा रुख तय करने में हो रही मुश्किल: भारत

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  • Publish Date - March 14, 2026 / 09:29 PM IST,
    Updated On - March 14, 2026 / 09:29 PM IST

नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) भारत ने शनिवार को स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर ब्रिक्स देशों के बीच साझा रुख तय करना मुश्किल है क्योंकि सदस्य देशों के “अलग-अलग विचार” हैं। हालांकि भारत इस मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश में जुटा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने किसी देश का नाम लिए बगैर कहा कि ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं, जिसकी वजह से समूह के लिए एक साझा रुख तय करना कठिन हो गया है।

भारत फिलहाल इस प्रभावशाली समूह की अध्यक्षता कर रहा है। हाल ही में इस समूह का विस्तार हुआ है और इसमें ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात समेत कुछ अन्य देशों को शामिल किया गया है।

अमेरिका-इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके बाद ईरान ने यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर जवाबी कार्रवाई की।

ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में भारत के सामने चुनौती है कि पश्चिम एशिया के इस संघर्ष पर ब्रिक्स का एक साझा रुख कैसे तैयार किया जाए।

जायसवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “ब्रिक्स के कुछ सदस्य फिलहाल पश्चिम एशिया संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं, जिसकी वजह से संघर्ष पर ब्रिक्स का साझा रुख तय करने में समस्या हुई है।”

उन्होंने कहा कि भारत “शेरपा चैनल” के माध्यम से ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा को आगे बढ़ा रहा है। अंतिम शेरपा बैठक 12 मार्च को डिजिटल माध्यम से आयोजित की गई थी।

जायसवाल ने कहा, “हम एक साझा रुख तय करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अलग-अलग विचारों के कारण यह मुश्किल हो रहा है। ”

उन्होंने कहा, “हम ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि इस संघर्ष पर कोई साझा रुख तय किया जा सके।”

बृहस्पतिवार रात विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अरागची के बीच फोन पर भी इस मुद्दे पर बातचीत हुई।

ब्रिक्स समूह में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में विस्तार कर मिस्र, इथोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हो गया।

ब्रिक्स अब एक प्रभावशाली समूह बनकर उभरा है, जिसमें दुनिया की 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं।

भाषा जोहेब माधव

माधव