दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर टिप्पणी को लेकर टी. जी. मोहनदास के खिलाफ मामला दर्ज
दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर टिप्पणी को लेकर टी. जी. मोहनदास के खिलाफ मामला दर्ज
तिरुवनंतपुरम, 29 जुलाई (भाषा) केरल पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने दिल्ली में कथित नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए छात्रों के प्रदर्शन पर यूट्यूब में एक वीडियो में की गई टिप्पणियों को लेकर दक्षिणपंथी राजनीतिक टिप्पणीकार टी. जी. मोहनदास के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, यह मामला एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि मोहनदास के यूट्यूब चैनल ‘पत्रिका’ पर अपलोड किए गए वीडियो का उद्देश्य सार्वजनिक शांति भंग करना तथा लोगों में भय और अशांति फैलाना था।
प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 192 और 353(1)(बी), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 तथा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120(ओ) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
यह मामला दंगा भड़काने के इरादे से उकसाने, भय या दहशत फैलाने वाले बयान देकर सार्वजनिक शांति भंग करने, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कंप्यूटर से जुड़े अपराधों तथा केरल पुलिस अधिनियम के सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।
वीडियो में मोहनदास ने कथित तौर पर कहा कि दिल्ली में छात्रों का प्रदर्शन ‘‘सामूहिक दुष्कर्म जैसी घटनाओं का कारण बन सकता है।’’ उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसे मामलों में कोई शिकायत नहीं होगी क्योंकि ‘‘प्रदर्शन में शामिल लोगों को बलात्कार पसंद है और कुछ ऐसी लड़कियां भी हैं जो बलात्कार का आनंद लेती हैं।’’
उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि यदि वह प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रहे होते, तो कर्फ्यू लागू कर देते, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर होने का आदेश देते और आदेश न मानने पर ‘‘गोली चलाने’’ के निर्देश देते। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही कुछ लोग मारे जाते या वे स्थायी रूप से घायल हो जाते लेकिन कुछ ही घंटों में स्थिति नियंत्रण में आ जाती और शवों को अस्पताल भेज दिया जाता।
प्राथमिकी के अनुसार साइबर पुलिस को यह शिकायत 29 जुलाई को ई-मेल के माध्यम से प्राप्त हुई थी।
पुलिस का आरोप है कि ये वीडियो 24 और 25 जुलाई को इस उद्देश्य से अपलोड और प्रसारित किए गए थे कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल लोगों के बीच भय फैलाकर सार्वजनिक शांति भंग की जाए।
मामले की जांच जारी है।
भाषा शोभना सिम्मी
सिम्मी

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