नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) स्कूलों में स्वच्छता सेवाओं से वंचित बच्चों का करीब पांचवां हिस्सा भारत में है, जो दुनिया के किसी भी देश से अधिक है। डब्ल्यूएचओ-यूनिसेफ के संयुक्त निगरानी कार्यक्रम (जेएमपी) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
‘‘स्कूलों में पेयजल, स्वच्छता और साफ-सफाई की प्रगति 2015-2025’’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 में दुनिया के 24.4 करोड़ उन बच्चों में से पांच करोड़ बच्चे भारत में थे, जिन्हें स्कूलों में स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आकलन की गई अवधि के दौरान भारत में स्वच्छता सेवाओं से वंचित स्कूलों की संख्या में 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का संयुक्त निगरानी कार्यक्रम पेयजल, स्वच्छता और साफ-सफाई (वॉश) में प्रगति के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय अनुमान तैयार करता है और वॉश से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की वैश्विक निगरानी के लिए जिम्मेदार है।
सतत विकास के लिए वर्ष 2030 के एजेंडा में जल और स्वच्छता तथा शिक्षा के लिए वैश्विक लक्ष्य शामिल हैं। लक्ष्य चार का उद्देश्य ‘‘सभी के लिए समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना तथा आजीवन सीखने को बढ़ावा देना’’ है।
इसमें ऐसी शिक्षा सुविधाओं के निर्माण और उन्नयन के लक्ष्य भी शामिल हैं, जो बच्चों, दिव्यांगजनों और लैंगिक जरूरतों के प्रति संवेदनशील हों तथा सभी के लिए सुरक्षित और प्रभावी सीखने का वातावरण उपलब्ध कराएं।
इसमें सभी स्कूलों में बिजली, कंप्यूटर, इंटरनेट, दिव्यांग छात्रों के अनुकूल बुनियादी ढांचे और सामग्री तथा बुनियादी पेयजल, स्वच्छता और साफ-सफाई (वॉश) सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
लक्ष्य छह का उद्देश्य ‘‘सभी के लिए जल और स्वच्छता की उपलब्धता तथा इसका सतत प्रबंधन सुनिश्चित करना’’ है और इसमें सभी के लिए सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और साफ-सफाई तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लक्ष्य शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘2025 में प्रगति के बावजूद, 24.4 करोड़ बच्चे अब भी अपने स्कूलों में स्वच्छता सेवाओं से वंचित थे।’’
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें भारत के पांच करोड़, नाइजीरिया के 3.4 करोड़, इथियोपिया के 2.6 करोड़, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के 1.1 करोड़ और इंडोनेशिया के 80 लाख बच्चे शामिल थे।
सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की निगरानी के लिए, बुनियादी पेयजल सेवा का अर्थ है कि स्कूलों में किसी कार्यशील बेहतर जल स्रोत तक पहुंच हो। बुनियादी स्वच्छता सेवा का अर्थ है कि स्कूलों में बेहतर स्वच्छता सुविधाएं हों, जो लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग हों और उपयोग योग्य हों। बुनियादी साफ-सफाई सेवा का अर्थ है कि सर्वेक्षण के समय स्कूलों में साबुन और पानी के साथ हाथ धोने की सुविधाएं उपलब्ध हों।
साफ-सफाई अब भी चिंता का एक अन्य विषय है। भारत में करीब दो करोड़ बच्चे स्कूलों में साफ-सफाई की सुविधा से वंचित थे। हालांकि, जेएमपी ने कहा कि हाल के पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण वह भारत और मध्य तथा दक्षिणी एशिया क्षेत्र के लिए 2024 के बाद साफ-सफाई की सुविधा की पहुंच के अनुमान तैयार नहीं कर सका।
स्कूलों में पेयजल की सुविधा तक पहुंच के मामले में भारत का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से बेहतर रहा। 2025 में भारत में करीब 1.2 करोड़ बच्चे स्कूलों में पेयजल सेवाओं से वंचित थे, जो दुनियाभर में ऐसी सेवाओं से वंचित हर 20 बच्चों में से लगभग एक के बराबर है।
निगरानी रिपोर्ट में कहा गया है कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की अवधि समाप्त होने में अब केवल पांच साल शेष हैं, लेकिन दुनिया 2030 तक स्कूलों में बुनियादी पेयजल, स्वच्छता और साफ-सफाई (वॉश) सेवाओं की सार्वभौमिक उपलब्धता हासिल करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है।
भाषा तान्या संतोष
संतोष