खाद्य सुरक्षा संबंधी समस्याएं जनस्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती, लोग अब भी अनजान: तुकाराम मुंडे
खाद्य सुरक्षा संबंधी समस्याएं जनस्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती, लोग अब भी अनजान: तुकाराम मुंडे
अहमदाबाद, 26 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने शनिवार को कहा कि भारत में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या है कि यह ‘जनस्वास्थ्य में भारी नुकसान’ का कारण बन रही है, लेकिन लोगों को अभी इसका एहसास नहीं है।
मुंडे ने कहा कि लोग अक्सर बीमारियों को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में देखते हैं और उनका संबंध अपने खाने-पीने की चीजों से नहीं जोड़ते।
उन्होंने अहमदाबाद के कर्णावती विश्वविद्यालय में ‘तुकाराम से टक्कर’ संवाद सत्र के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई कानून, नियम और नियमावली पहले से मौजूद हैं लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।
आईएएस अधिकारी ने कहा, “भारत में खाद्य सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ी समस्या है कि यह जनस्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा रही है। हमें इसका एहसास नहीं हो रहा है। जितनी जल्दी हम इसे समझेंगे और इसकी अहमियत को स्वीकार करेंगे, हमारे लिए उतना ही बेहतर होगा।”
उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी समस्या यह है कि मौजूद नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
मुंडे ने संवाददाताओं से कहा, “नियम मौजूद हैं, कानून मौजूद हैं। लाइसेंस और पंजीकरण को छोड़कर शायद ही कोई नियम लागू किया जा रहा है। इस तरह हम जनस्वास्थ्य से समझौता कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि लोग अक्सर बीमारियों को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में देखते हैं और उनका संबंध अपने खाने-पीने की चीजों से नहीं जोड़ते।
अधिकारी ने आजादी के बाद से भारत में बीमारियों के स्वरूप में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा, “आजादी के समय भारत में बीमारी के कुल बोझ का करीब 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा संक्रामक रोगों के कारण था, जबकि आज देश में बीमारी के कुल बोझ का लगभग इतना ही हिस्सा गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के कारण है।”
मुंडे ने कहा, “आज कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। यहां तक कि 25-30 साल की उम्र में भी लोगों को हृदयाघात हो रहा है और इसका सीधा संबंध हमारे खान-पान से है।”
उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा और मानकों को लेकर जागरूकता एवं संवेदनशीलता की कमी भी एक बड़ी चिंता का विषय है।
भाषा जितेंद्र सुरेश
सुरेश

Facebook


