भारत में पहली बार 45 लाख साल पुराने मीठे पानी की मछलियों के जीवाश्म देहरादून के नजदीक मिले
भारत में पहली बार 45 लाख साल पुराने मीठे पानी की मछलियों के जीवाश्म देहरादून के नजदीक मिले
देहरादून, छह अप्रैल (भाषा) भारत में पहली बार 45 लाख वर्ष पुराने मीठे पानी की मछलियों ट्राइकोगैस्टर फैसियाटा यानी गौरामिस के जीवाश्म देहरादून के नजदीक मिले हैं।
यहां स्थित वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (डब्लूआईएचजी) को यह सफल मिली है। संस्थान को प्लायोसीन काल के ताजा पानी की मछलियों के ओटोलिथ (मछलियों के आंतरिक कान में पाई जाने वाली हड्डी, जो उनके संतुलन और सुनने में मदद करती हैं) जीवाश्म उत्तरपश्चिम हिमालय में देहरादून से सटे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के मोहंड से मिले।
संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक एन प्रेमजीत सिंह ने इस खोज को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि नियोजीन काल (मायोसीन काल एवं प्लायोसीन काल) के शिवालिक जमाव को लंबे समय से उनके समृद्ध स्थलीय जीवाश्म रिकॉर्ड के लिए पहचाना जाता है, लेकिन मीठे पानी के जीव-जंतुओं के अवशेष अब तक लगभग अज्ञात ही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इस अध्ययन में पहली बार मोहंड के ऊपरी शिवालिक पाइलोसीन काल के जमावों में मीठे पानी की मछलियों के ओटोलिथ जीवाश्म पाए गए हैं।’’
सिंह ने बताया कि अध्ययन के दौरान मछलियों के तीन प्रकार के समूहों- चेन्ना (चेन्नीडेई), ट्राइकोगैस्टर फैसियाटा (ओस्फोनेमिडाई) और गोबीडेई इंडेट के जीवाश्म मिले।
उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से टी फैसियाटा (सामान्य नाम-गौरामिस) का विश्व में यह दूसरा जबकि भारत में खोजा गया पहला ओटोलिथ जीवाश्म है। इसका पहला जीवाश्म इंडोनेशिया के सुमात्रा में खोजा गया था।’’
अध्ययन के अनुसार, यह जीव समूह मध्य स्तर के शिकार और शीर्ष शिकारी जीवों से बनी एक संरचित पोषण संरचना को दर्शाता है। ये जीव-जंतु घटक एक शांत, संभवतः स्थिर जल वाले मीठे पानी के आवास का संकेत देते हैं जिसमें घनी वनस्पति हो और जो मछलियों के अनुरूप हो।
सिंह ने कहा, ‘‘ओटोलिथ की सीमित संख्या के बावजूद यह संग्रह हिमालयी क्षेत्र में पाइलोसीन काल की मीठे पानी की जैव विविधता के बारे में दुर्लभ लेकिन महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।’’
भाषा दीप्ति धीरज
धीरज

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