जयपुर के खजाना महल में पहली बार गणेश उत्सव, 280 किलोग्राम की प्रतिमा स्थापित

जयपुर के खजाना महल में पहली बार गणेश उत्सव, 280 किलोग्राम की प्रतिमा स्थापित

जयपुर के खजाना महल में पहली बार गणेश उत्सव, 280 किलोग्राम की प्रतिमा स्थापित
Modified Date: September 14, 2026 / 02:44 pm IST
Published Date: September 14, 2026 2:44 pm IST

जयपुर, 14 सितंबर (भाषा) जयपुर के प्रसिद्ध खजाना महल में इस वर्ष पहली बार गणेश उत्सव की शुरुआत की गई है, जहां बेशकीमती पत्थर से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

खजाना महल के अनुसार, यहां पहली बार भगवान गणेश की एक प्रतिमा स्थापित की गई है, जो लाल ‘जैस्पर स्टोन’ से बनी है। करीब 280 किलोग्राम वजन वाली यह प्रतिमा एक ही पत्थर से तैयार की गई है। इसे सोने की परत, रूबी और पन्ना रत्न की नक्काशी तथा प्राकृतिक पत्थरों के रंगों से सजाया गया है।

संग्रहालय के संस्थापक अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रतिमा का निर्माण जौहरी जितेश गर्ग ने कराया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पहली बार यहां गणेश उत्सव आयोजित किया जा रहा है, जो पांच दिन तक चलेगा।

श्रीवास्तव ने कहा कि पांचवें दिन मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा, जबकि लाल ‘जैस्पर स्टोन’ से बनी प्रतिमा को बाद में संग्रहालय में दर्शनार्थ रखा जाएगा।

खजाना महल के संस्थापक के अनुसार, इस संग्रहालय में विभिन्न बेशकीमती पत्थरों से बनी भगवान गणेश की कई प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखी गई हैं। इनमें पीले ‘एवेंचुराइन’ पत्थर से बनी करीब 750 किलोग्राम वजन की विशाल गणेश प्रतिमा भी शामिल है, जिसे संग्रहालय के प्रमुख आकर्षणों में माना जाता है।

अनूप ने बताया कि संग्रहालय का खास आकर्षण ‘पायराइट स्टोन’ की 48,500 कैरेट की स्वयंभू गणेश प्रतिमा है, जो स्पेन की खान से निकली है।

खजाना महल संग्रहालय करीब 200 वर्ष पुरानी ‘चीता की हौदी बारूद खाना’ हवेली में स्थापित है। संग्रहालय में दुर्लभ और वास्तविक रत्नों एवं आभूषणों का बड़ा संग्रह मौजूद है।

संग्रहालय के अनुसार, यहां दो हजार से अधिक दुर्लभ रत्न और आभूषण प्रदर्शित हैं।

इसके अलावा संग्रहालय में उल्कापिंड, कथित रूप से रामसेतु से जुड़ा तैरता हुआ पत्थर, शार्क के दांत से बना हीरा, डायनासोर के अवशेष से बना हीरा, 111 किलोग्राम वजन की विशाल अंगूठी, कोहिनूर की प्रतिकृति तथा कलियुग के अंतिम अश्वमेध यज्ञ की प्रतिकृति भी प्रदर्शित की गई है। यहां महाराजा सवाई जय सिंह की प्रतिमा भी मौजूद है।

भाषा बाकोलिया मनीषा नेत्रपाल

नेत्रपाल


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