जबरन धर्मांतरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, सुमेर सिंह सोलंकी ने केंद्रीय कानून की मांग की

जबरन धर्मांतरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, सुमेर सिंह सोलंकी ने केंद्रीय कानून की मांग की

जबरन धर्मांतरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, सुमेर सिंह सोलंकी ने केंद्रीय कानून की मांग की
Modified Date: March 27, 2026 / 01:55 pm IST
Published Date: March 27, 2026 1:55 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) मध्य प्रदेश से भाजपा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कड़े केंद्रीय कानून की मांग करते हुए शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है और आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान पर इसका असर पड़ रहा है।

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सोलंकी ने कहा कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन धोखे, दबाव और लालच के जरिए किया गया धर्मांतरण कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से अपराध है।

उन्होंने कहा, “इस प्रकार के धर्मांतरण हमारे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।”

सांसद ने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय की पहचान सनातन धर्म की संस्कृति और परंपराओं में निहित है, लेकिन इस समुदाय को डर, दबाव और धमकी; रोजगार, चिकित्सा और शिक्षा के प्रलोभन; नशा, अंधविश्वास और भ्रामक जानकारी; अशिक्षा और गरीबी ; तथा फर्जी विवाह जैसे माध्यमों से निशाना बनाया जा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संगठित और सामूहिक धर्मांतरण संगठित अपराध की श्रेणी में आते हैं।

सोलंकी ने कहा, “हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराएं, रीति-रिवाज और पहचान को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है। गांवों में तनाव बढ़ रहा है और देश के कई हिस्सों से शिकायतें सामने आ रही हैं।”

उन्होंने सरकार से मांग की कि जबरन, धोखाधड़ी और प्रलोभन देकर किए गए धर्मांतरण पर सख्त कानूनी दंड का प्रावधान किया जाए, दोषियों की गिरफ्तारी और अभियोजन सुनिश्चित किया जाए, और झूठे आधार पर धर्मांतरण करने वालों को मिलने वाले लाभों की समीक्षा कर उन्हें सूची से बाहर करने पर विचार किया जाए, क्योंकि इससे वास्तविक आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।

सांसद ने उच्चतम न्यायालय के 24 मार्च, 2026 के फैसले का स्वागत किया, जिसमें धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त होने की बात कही गई। सोलंकी ने आदिवासी समुदायों की सुरक्षा के लिए इसी तरह का कानूनी ढांचा बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, “उनके अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और उन्हें उनका अधिकार वापस मिलना चाहिए।”

भाषा मनीषा माधव

माधव


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