सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें अब भी सक्रिय, उन्हें हराना जरूरी: मोदी

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें अब भी सक्रिय, उन्हें हराना जरूरी: मोदी

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें अब भी सक्रिय, उन्हें हराना जरूरी: मोदी
Modified Date: January 11, 2026 / 01:59 pm IST
Published Date: January 11, 2026 1:59 pm IST

सोमनाथ (गुजरात), 11 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि आजादी के बाद गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें अब भी सक्रिय हैं और भारत को उन्हें हराने के लिए सतर्क, एकजुट तथा शक्तिशाली बने रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है। उन्होंने कहा कि यह समय का चक्र है जिसके तहत आततायी अब इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी शान से खड़ा है।

मोदी यहां आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित कर रहे थे, जो 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया है।

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प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘नफरत, अत्याचार और आतंक का सच्चा इतिहास हमसे छिपाया गया और हमें सिखाया गया कि यह हमला मंदिर को लूटने का प्रयास था।’’

मोदी ने कहा कि यदि सोमनाथ पर हमला धन-संपत्ति लूटने के लिए किया गया होता, तो पहला हमला ही काफी था लेकिन इस पर बार-बार हमले किए गए और इसके देवता का अपमान किया गया।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तो उनके रास्ते में बाधाएं खड़ी की गईं।

मोदी ने कहा, ‘‘तुष्टीकरण में लिप्त लोगों ने चरमपंथी मानसिकता वाले लोगों के सामने घुटने टेक दिए। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में बाधा डालने वाली ताकतें आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। ऐसी ताकतों को हराने के लिए हमें सतर्क, एकजुट और शक्तिशाली बने रहने की जरूरत है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सोमनाथ की कहानी भारत की कहानी है। विदेशी आततायियों ने इस मंदिर की तरह कई बार भारत को नष्ट करने की कोशिश की। आततायियों ने सोचा कि मंदिर को नष्ट करके उन्होंने जीत हासिल कर ली है लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ का झंडा शान से लहरा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में इन 1,000 वर्षों के संघर्ष की कोई बराबरी नहीं है।

भाषा गोला नेत्रपाल

नेत्रपाल

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