पूर्व डीजीपी अनुराग धनखड़ मौत मामला : जांच टीम में सात और अधिकारी शामिल

पूर्व डीजीपी अनुराग धनखड़ मौत मामला : जांच टीम में सात और अधिकारी शामिल

पूर्व डीजीपी अनुराग धनखड़ मौत मामला : जांच टीम में सात और अधिकारी शामिल
Modified Date: July 27, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: July 27, 2026 10:09 pm IST

अगरतला, 27 जुलाई (भाषा) त्रिपुरा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ की मौत की जांच कर रही टीम में सात और अधिकारियों को शामिल किया गया है। पश्चिम त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नमित पाठक द्वारा सोमवार को जारी आदेश में यह जानकारी दी गई।

यह कदम धनखड़ की मौत की न्यायिक जांच की माकपा और कांग्रेस की मांग के बीच उठाया गया है।

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले में हीरा कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ सीबीआई जांच का नेतृत्व करने वाले तथा 1984 के सिख विरोधी दंगों की दोबारा जांच की अगुवाई कर चुके धनखड़ 20 जुलाई को राज्य पुलिस मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय के शौचालय में फंदे से लटके मिले थे।

आदेश के अनुसार मामले की गहन, समन्वित और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के लिए एसपी नमित पाठक के नेतृत्व वाली जांच टीम का पुनर्गठन किया गया है और उसमें सात अतिरिक्त अधिकारियों को शामिल किया गया है।

आदेश के अनुसार, जांच की प्रगति की समीक्षा, मामले में हुए घटनाक्रम पर चर्चा, जिम्मेदारियां तय करने और आगे की रणनीति बनाने के लिए प्रतिदिन बैठक आयोजित की जाएगी।

इसमें कहा गया है कि सभी संबंधित अधिकारी प्रतिदिन जांच की प्रगति, जुटाए गए साक्ष्य, तकनीकी विश्लेषण और कार्रवाई रिपोर्ट पश्चिम त्रिपुरा के एसपी को सौंपेंगे।

इससे पहले सोमवार को माकपा विधायक दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल इंद्रसेना रेड्डी नल्लू से मुलाकात कर धनखड़ की मौत की उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग की।

माकपा के प्रदेश सचिव जितेंद्र चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारी तरह पूरे देश के लोगों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि धनखड़ जैसे अधिकारी, जिन्होंने कई चर्चित मामलों की सफल सीबीआई जांच की, राज्य के सबसे सुरक्षित स्थान अपने कार्यालय में आत्महत्या कर सकते हैं। उनका शव उनके कक्ष से जुड़े शौचालय में वर्दी में मिला था, जबकि उनकी टोपी फर्श पर पड़ी थी।’

उन्होंने दावा किया कि घटना से करीब एक घंटे पहले ही धनखड़ ने पुलिस मुख्यालय में साप्ताहिक औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ परेड में हिस्सा लिया था और उनमें तनाव या परेशानी के कोई संकेत नहीं थे।

चौधरी ने कहा, ’44 लाख लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला अधिकारी इस तरह अपनी जान दे देगा? आत्महत्या के सिद्धांत पर सवाल उठाने के पर्याप्त आधार हैं।’

उन्होंने कहा कि माकपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वह धनखड़ के परिवार को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार को उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराने का निर्देश दें।

उन्होंने कहा, ‘हमें पश्चिम त्रिपुरा के एसपी नमित पाठक के नेतृत्व वाली जांच टीम से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन पूरी जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए।’

रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने भी धनखड़ की मौत की न्यायिक जांच की मांग की थी।

विपक्ष की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक रंजीत दास ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल डीजीपी की दुर्भाग्यपूर्ण मौत को लेकर राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

दास ने कहा, ‘जितेंद्र चौधरी और सुदीप रॉय बर्मन दोनों राजनीतिक फायदा उठाने के लिए डीजीपी की मौत को लेकर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। मामले की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच पहले ही शुरू हो चुकी है।’

भाषा

राखी अविनाश

अविनाश


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