धार में भोजशाला परिसर के पास दरगाह की जमीन पर जुमे की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त : न्यायालय

धार में भोजशाला परिसर के पास दरगाह की जमीन पर जुमे की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त : न्यायालय

धार में भोजशाला परिसर के पास दरगाह की जमीन पर जुमे की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त : न्यायालय
Modified Date: July 30, 2026 / 04:09 pm IST
Published Date: July 30, 2026 4:09 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मुस्लिम पक्ष को मध्य प्रदेश के धार में विवादित भोजशाला परिसर से सटी दरगाह के परिसर में शुक्रवार की नमाज अदा करने की इजाजत दे दी।

न्यायालय ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मुसलमानों को शुक्रवार को अपराह्न एक बजे से तीन बजे के बीच उस जगह पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने हालांकि, कहा कि इस निर्देश का मतलब यह नहीं है कि राज्य सरकार और मुस्लिम पक्ष आपसी सहमति से शुक्रवार की नमाज के लिए कोई दूसरी जगह नहीं तलाश सकते।

पीठ ने 14 जुलाई को निर्देश दिया था कि जब तक मामले का फैसला नहीं हो जाता, तब तक धार में विवादित जगह के पास शुक्रवार को अपराह्न एक बजे से तीन बजे के बीच नमाज के लिए एक अलग खुली जगह उपलब्ध कराई जाए।

बाद में, हाजी मुनीर अहमद की अगुवाई में मुस्लिम पक्ष ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया और आरोप लगाया कि वैकल्पिक जगह देने के अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है; उनका कहना था कि धार प्रशासन जो जगह दे रहा था, वह विवादित भोजशाला परिसर से 1.3 किलोमीटर दूर थी।

उन्होंने कहा कि जगह इतनी पास होनी चाहिए कि मुसलमान नमाज पढ़ते समय मस्जिद को देख सकें।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई को फैसला सुनाया कि धार जिले में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है।

साथ ही, इसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के दशकों पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को उस जगह पर शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने की इजाजत दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि केंद्र और एएसआई भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन के बारे में फैसला ले सकते हैं।

भाषा प्रशांत पवनेश

पवनेश


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