‘भ्रष्टाचार के यार’ राजनीति में नैतिकता स्थापित करने की कोशिश का कर रहे हैं विरोध : भाजपा

‘भ्रष्टाचार के यार’ राजनीति में नैतिकता स्थापित करने की कोशिश का कर रहे हैं विरोध : भाजपा

‘भ्रष्टाचार के यार’ राजनीति में नैतिकता स्थापित करने की कोशिश का कर रहे हैं विरोध : भाजपा
Modified Date: August 25, 2025 / 04:32 pm IST
Published Date: August 25, 2025 4:32 pm IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने संबंधी तीन विधेयकों पर विपक्ष की आपत्ति की आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि ‘‘भ्रष्टाचार के यार’’ राजनीति में नैतिकता लाने के सरकार के प्रयास का विरोध कर रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन विधेयकों का उद्देश्य ‘‘नैतिकता, स्वच्छ राजनीति और सुशासन’’ लाना है।

उन्होंने कहा कि ये राजनीति में भ्रष्टाचार और अपराधीकरण के खिलाफ प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए एक ‘‘हथियार या उपकरण’’ के रूप में काम कर सकते हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया, ‘‘पूरा देश इन विधेयकों का स्वागत कर रहा है। मुट्ठी भर विपक्षी दल कह रहे हैं कि वे नैतिकता के साथ नहीं, बल्कि बेशर्मी के साथ हैं। वे कह रहे हैं कि वे अपने परिवार के साथ हैं, राजनीति में मर्यादा और सिद्धांतों के साथ नहीं… ये ‘‘भ्रष्टाचार के यार’’ विधेयकों का विरोध कर रहे हैं।’’

पूनावाला ने विधेयकों के खिलाफ विपक्षी दलों के रुख की आलोचना करते हुए उन्हें ‘‘भ्रष्टाचारियों की रेल’’ बताया और आरोप लगाया कि वे लोकतंत्र और संविधान को बचाने के नाम पर ‘‘भ्रष्टाचार’’ को बचाने के लिए एक साथ आए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘आप (विपक्षी नेता)लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर रहे हैं। आप अपने परिवार द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को बचा रहे हैं।’’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा में गत बुधवार को ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किए। बाद में उनके प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया।

विपक्षी दल तीन विधेयकों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ के बाद, भाजपा अब ‘सत्ता चोरी’ में लगी हुई है, क्योंकि वह ‘‘30 दिनों के भीतर विपक्षी सरकारों को गिराने’’ और गिरफ्तारी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करके लोकतंत्र को ‘‘अस्थिर’’ करने के लिए मसौदा विधेयक ला रही है।

तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पहले ही कह चुकी हैं कि वे इन विधेयकों की समीक्षा के लिए गठित संसद की संयुक्त समिति में अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी को नामित नहीं करेंगी। आम आदमी पार्टी ने भी रविवार को घोषणा की कि वह भी समिति की बैठकों में भाग नहीं लेगी।

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में