असम से गुजरात तक: भाजपा ने खरगे के खिलाफ ‘एमसीसी उल्लंघन’ के लिए कार्रवाई की मांग की।
असम से गुजरात तक: भाजपा ने खरगे के खिलाफ 'एमसीसी उल्लंघन' के लिए कार्रवाई की मांग की।
नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को निर्वाचन आयोग (ईसी) से संपर्क कर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की असम में कथित ‘भड़काऊ’ टिप्पणी और गुजरात एवं कुछ अन्य राज्यों के लोगों को लेकर की गई टिप्पणी के लिए विपक्षी दल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किये जाने और उसके अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की।
भाजपा ने आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के उल्लंघन का हवाला देते हुए आयोग से आग्रह किया कि वह चुनाव अवधि के दौरान खरगे के किसी भी चुनावी रैली, सार्वजनिक सभा को संबोधित करने या कोई भी सार्वजनिक भाषण देने पर रोक लगाये।
निर्वाचन आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में, भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि खरगे ने असम के नीलमबाजार में विधानसभा चुनाव से पहले एक रैली में मुख्य रूप से मुस्लिम मतदाताओं को संबोधित करते हुए ‘सांप्रदायिक और भड़काऊ’ बयान दिए।
भाजपा ने दावा किया कि खरगे ने कुरान का हवाला दिया और भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना ‘जहरीले सांप’ से की, जो हिंसा भड़काने के बराबर है।
प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि वह कांग्रेस अध्यक्ष को अपने बयान वापस लेने और सार्वजनिक माफी मांगने का निर्देश दे। प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार और अर्जुन राम मेघवाल शामिल थे।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मेघवाल ने आरोप लगाया कि खरगे ने सात अप्रैल को चुनाव प्रचार के दौरान एक विशेष समुदाय को निशाना बनाते हुए ऐसी टिप्पणियां कीं जिनसे तनाव भड़क सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए सात अप्रैल को चुनाव प्रचार के दौरान, उन्होंने कहा कि कुरान में लिखा है कि यदि नमाज पढ़ते समय कोई जहरीला सांप दिखाई दे, तो नमाज छोड़कर उसे मार देना चाहिए। ऐसे बयान लोगों को भड़काते हैं और समाज के कुछ वर्गों को उकसाते हैं।’
मंत्री ने गुजरात और अन्य राज्यों के लोगों को ‘अशिक्षित’ कहने के लिए खरगे की कड़ी आलोचना की। मेघवाल ने कहा, ‘हमने उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।’
रविवार को केरल के इडुक्की जिले में एक चुनावी रैली में खरगे ने कहा था कि दक्षिणी राज्य के लोग ‘शिक्षित और चतुर’ हैं और उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता, जबकि गुजरात और कुछ अन्य जगहों के लोग ‘अशिक्षित’ हैं।
भाजपा ने निर्वाचन आयोग को दी गई शिकायत में दलील दी कि ये बयान चुनावी लाभ के लिए धर्म का दुरुपयोग हैं, समुदायों के बीच शत्रुता बढ़ाने वाले हैं और भड़काऊ प्रचार हैं तथा ये सभी आदर्श आचार संहिता के तहत प्रतिबंधित हैं। भाजपा ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का भी हवाला दिया, जिनमें धार्मिक आधार पर अपील और घृणा को बढ़ावा देने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
पार्टी ने दावा किया कि ये टिप्पणियां भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध हैं।
भाषण को सांप्रदायिक लामबंदी का ‘सोचा-समझा’ प्रयास बताते हुए भाजपा ने कहा कि यह मुस्लिम मतदाताओं की धार्मिक भावनाओं का चुनावी लाभ उठाने के लिए दिया गया था।
मेघवाल ने कहा कि जब आदर्श आचार संहिता लागू है, ऐसे बयान स्वीकार्य नहीं हैं और अपराध की श्रेणी में आते हैं।
उन्होंने कहा, “जब सभी राज्यों में आचार संहिता लागू है और चुनाव कानून एवं आपराधिक कानून के तहत ऐसे बयान नहीं दिए जा सकते। किसी विशेष समुदाय को उकसाना या धार्मिक भावनाओं को भड़काना एक अपराध है।’’
भाजपा नेता ने खरगे की उस कथित टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने गुजरात और कुछ अन्य राज्यों के लोगों को “अशिक्षित” बताया था और इसे उन राज्यों और वहां के निवासियों का अपमान बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘गुजरात और अन्य राज्यों के लोग ऐसे अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस पर राजनीतिक चर्चा के स्तर में गिरावट का भी आरोप लगाया और दावा किया कि विपक्षी दल के वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार के दौरान अनुचित और अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
मेघवाल ने कहा, “जब से राहुल गांधी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता का पदभार संभाला है, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के भाषणों का स्तर गिर गया है और अपशब्दों का इस्तेमाल बढ़ गया है।”
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उचित कार्रवाई की जाएगी।
भाषा अमित अविनाश
अविनाश

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