भविष्य के युद्ध किसी एक सैन्य बल के दम पर नहीं लड़े जा सकते: एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह

भविष्य के युद्ध किसी एक सैन्य बल के दम पर नहीं लड़े जा सकते: एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह

भविष्य के युद्ध किसी एक सैन्य बल के दम पर नहीं लड़े जा सकते: एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह
Modified Date: July 22, 2026 / 01:44 pm IST
Published Date: July 22, 2026 1:44 pm IST

करवार (कर्नाटक), 22 जुलाई (भाषा) एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने बुधवार को कहा कि भविष्य के युद्ध किसी एक सैन्य बल के दम पर नहीं लड़े जा सकते। उन्होंने सशस्त्र बलों के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्तता की जरूरत पर जोर दिया।

माहे श्रेणी के पनडुब्बी रोधी वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) के दूसरे पोत आईएनएस मालवन के जलावतरण के बाद सिंह ने कहा कि सैन्य प्रौद्योगिकियों का विकास इतनी तेजी से किया जाना चाहिए कि वे प्रासंगिक बनी रहें, क्योंकि “तकनीक में देरी, तकनीक से वंचित होने के समान है।”

उन्होंने विशेष रूप से भारतीय वायुसेना का उल्लेख करते हुए विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, “भविष्य में कोई भी युद्ध किसी एक सैन्य बल के दम पर नहीं लड़ा जाएगा। हम सभी, चाहे हम वायुसेना, नौसेना या ओजी (थलसेना के ऑलिव ग्रीन) में हों या किसी अन्य संबद्ध सेवा में, हमें एक राष्ट्र के रूप में मिलकर लड़ना होगा और तभी हम सफल होंगे।”

सिंह ने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में इस सामूहिक अभियान को मिली गति, विशेष रूप से प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) पद के गठन के बाद जो रफ्तार मिली, वह और मजबूत होगी। उन्होंने कहा, “हम सभी मिलकर आगे बढ़ेंगे और देश का गौरव बढ़ाएंगे।”

जलावतरण समारोह में पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक और सार्वजनिक क्षेत्र की कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि शामिल हुए।

वायुसेना प्रमुख ने कहा, “हम सभी समझते हैं कि भारत के विकास के लिए समुद्री सुरक्षा और समुद्री शक्ति कितनी महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि किसी भी देश के लिए समुद्री मार्ग उसके व्यापार को तय करते हैं और व्यापार ही उसके भविष्य को निर्धारित करता है। जहां तक भारत का सवाल है, हम सभी जानते हैं कि हिंद महासागर क्षेत्र हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना समुद्री संपर्क मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है कि भारत का व्यापार और आर्थिक विकास निर्बाध रूप से जारी रहे।

सिंह ने ईरान-अमेरिका संघर्ष का नाम लिए बिना कहा कि हाल के समय में दुनिया में हुए घटनाक्रमों ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता, जब तक उसके पास सुरक्षित समुद्री संपर्क मार्ग और मुक्त व्यापार की व्यवस्था न हो।

सरकार के आत्मनिर्भरता पर जोर देने का जिक्र करते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि नौसेना ने स्वदेशी पोत निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विमानन क्षेत्र भी इसी मॉडल को अपनाएगा।

भाषा तान्या वैभव

वैभव


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