युवाओं में हृदय गति रुकने के मामलों में वृद्धि पर गहलोत ने चिंता जताई

युवाओं में हृदय गति रुकने के मामलों में वृद्धि पर गहलोत ने चिंता जताई

युवाओं में हृदय गति रुकने के मामलों में वृद्धि पर गहलोत ने चिंता जताई
Modified Date: February 19, 2026 / 12:36 pm IST
Published Date: February 19, 2026 12:36 pm IST

जयपुर, 19 फरवरी (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को राज्य और केंद्र सरकार से युवाओं तथा बच्चों में अचानक हृदय गति रुकने एवं मौत की बढ़ती घटनाओं की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय वैज्ञानिक समिति गठित करने की मांग की।

गहलोत ने कहा कि जनता को इन मौतों के वास्तविक कारणों की जानकारी मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता टीकाराम जूली और अन्य विधायकों द्वारा विधानसभा में युवाओं और बच्चों में हृदय गति रुकने एवं अचानक मौत होने के मामलों को लेकर उठाई गई चिंताएं अत्यंत गंभीर हैं।”

गहलोत ने कहा कि स्वस्थ दिखने वाले युवाओं, जिनमें डॉक्टर भी शामिल हैं, की अचानक मौत समाज में भय और संदेह पैदा कर रही है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं का उल्लेख किया, जिनमें कोविड रोधी टीके के दुर्लभ दुष्प्रभावों जैसे ‘थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपीनिया सिंड्रोम’ (टीटीएस) की बात की गई है।

गहलोत ने कहा, “हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट में कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया, लेकिन ‘कोविड’ और टीके के हृदय संबंधी प्रणाली पर प्रभाव को लेकर वैश्विक स्तर पर शोध जारी है।”

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भ्रम दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है।

गहलोत ने बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2023 के बजट में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) में “पोस्ट-कोविड पुनर्वास केंद्र” स्थापित करने की घोषणा की थी ताकि ऐसे स्वास्थ्य मुद्दों पर शोध किया जा सके।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।

गहलोत ने कहा, “सरकार इसे ‘सामान्य’ कहकर खारिज नहीं कर सकती। मैं राज्य और केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि वे राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक जांच समिति का गठन करें।”

भाषा बाकोलिया मनीषा नेत्रपाल

नेत्रपाल


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