वैश्वीकरण और खुली अर्थव्यवस्था के लिए कानूनों में बदलाव आवश्यक: उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश
वैश्वीकरण और खुली अर्थव्यवस्था के लिए कानूनों में बदलाव आवश्यक: उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मुकुंदकम शर्मा ने मंगलवार को कहा कि जब भारत ने खुली अर्थव्यवस्था को अपनाया और वैश्वीकरण की ओर कदम बढ़ाया, तो यह महत्वपूर्ण हो गया कि उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए उसके कानूनों को अद्यतन और संशोधित किया जाए।
वह भारत के कानूनी पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक मानकों और कानूनी परिदृश्य के साथ संरेखित करने पर एसोचैम द्वारा आयोजित दूसरे ‘भारत लीगल कॉंक्लेव’ में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘जब हमने खुली अर्थव्यवस्था और खुले व्यापार एवं वाणिज्य को स्वीकार किया, तो हमारे कानूनों को अद्यतन, संशोधित करना पड़ा, और नए कानून लाने पड़े, ताकि वे समय की आवश्यकताओं और जरूरत के अनुरूप हों।’’
शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि भारत ने शुरू में स्वयं को एक समाजवादी देश घोषित किया था, जो एक विनियमित और नियोजित अर्थव्यवस्था तथा मिश्रित उत्पादन मॉडल को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हालांकि, वैश्वीकरण के आगमन के साथ, देश धीरे-धीरे एक खुली बाजार प्रणाली की ओर अग्रसर हुआ।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संविधान की प्रस्तावना में, हमने स्वयं को एक समाजवादी देश घोषित किया है, जो एक विनियमित और नियोजित अर्थव्यवस्था एवं मिश्रित उत्पादन का प्रतीक है। लेकिन वैश्वीकरण के साथ, हम खुली अर्थव्यवस्था, खुले बाजार की अवधारणा की ओर मुड़ गए हैं।’’
पूर्व न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इन दोनों अवधारणाओं के बीच निश्चित रूप से टकराव है। यह केवल हम ही नहीं हैं, बल्कि चीन और रूस जैसे साम्यवादी देश भी खुली अर्थव्यवस्था की इस धारणा को स्वीकार कर रहे हैं।’’
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी इस कार्यक्रम में डिजिटल माध्यम से शामिल हुए और सभा को संबोधित किया।
उन्होंने कहा, ‘‘तेजी से बदलते तकनीकी जगत में, हमारे कानूनी और नियामक ढांचे का इसके साथ तालमेल बिठाना आवश्यक है।’’
मंत्री ने कहा, ‘‘कानून एक सजीव संस्था है। यह स्थिर नहीं रह सकता। समाज की बदलती जरूरतों के अनुसार इसे लगातार विकसित होना चाहिए। व्यापार करने में सुगमता के साथ-साथ न्याय की सुगमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।’’
भाषा नेत्रपाल दिलीप
दिलीप

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