नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए), 2010 के तहत विदेशी चंदा प्राप्त करने व इस्तेमाल करने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) से जुड़े कई अपराधों के लिए लगाए जाने वाले जुर्माने में संशोधन किया है। एक गजट अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है।
मंत्रालय ने सोमवार को अधिनियम की धारा 41(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये आदेश जारी किए।
अधिसूचना के मुताबिक, अधिनियम की धारा- 8 का उल्लंघन कर प्रशासनिक खर्चों के लिए मिले विदेशी अंशदान के 20 प्रतिशत से अधिक राशि अन्य मदों पर खर्च करने पर जुर्माना एक लाख रुपये या सीमा से ज्यादा खर्च की गई रकम का पांच प्रतिशत – इनमें से जो भी ज़्यादा हो – लगाया जाएगा।
इसके मुताबिक ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) नियमावली, 2011’ के नियम 4 के साथ पठित अधिनियम की धारा 8(1) का उल्लंघन करते हुए सट्टेबाज़ी वाली गतिविधियों में विदेशी अंशदान का इस्तेमाल करने पर अब एक लाख रुपये या ऐसी गतिविधियों में निवेश की गई रकम का 30 प्रतिशत – इनमें से जो भी ज़्यादा हो – जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, उससे अर्जित होने वाली 100 प्रतिशत कमाई भी वसूल की जाएगी।
अधिसूचना के मुताबिक, अगर विदेशी चंदा किसी विशेष कार्य के लिए मिला है और उक्त राशि का इस्तेमाल दूसरे मद में किया जाता है, तो इस्तेमाल की गई रकम का 30 प्रतिशत या एक लाख रुपये- इनमें से जो भी ज़्यादा हो- जुर्माना लगाया जाएगा।
अधिसूचना में कहा गया है कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करके विदेशी चंदा स्वीकार करने या उसका उपयोग करने, अथवा उस धन का इस्तेमाल किसी ऐसे उद्देश्य के लिए या किसी ऐसे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में करने पर भी ऐसा ही जुर्माना लगाया जाएगा, जिसके लिए पंजीकरण नहीं दिया गया है।
गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक अलग अधिसूचना में विदेशी धन पाने के नियमों में भी बदलाव किया। इसके तहत एनजीओ को पहले से तय उद्देश्यों और काम के क्षेत्रों की सूची में से चुनाव करना होगा। इसमें कई तरह की धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी गई है, लेकिन अधिनियम के तहत पंजीकरण के लिए योग्य कई श्रेणियों में धर्मांतरण को स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि अगर किसी संगठन के मुख्य पदाधिकारियों में भारतीय मूल के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक शामिल हैं, तो इस कानून के तहत विदेशी धन प्राप्त करने के लिए पंजीकरण या पूर्व अनुमति देने के मामले में आम तौर पर विचार नहीं किया जाएगा।
अधिसूचना के मुताबिक, संशोधित नियमों में एक अपवाद रखा गया है। इसके तहत सरकार एक आदेश के जरिए ऐसे मामलों या परिस्थितियों को तय कर सकती है जिनमें विदेशी नागरिकों को एफसीआरए के तहत पंजीकरण या पूर्व अनुमति के लिए किसी संगठन का ‘मुख्य पदाधिकारी’ बनने की अनुमति दी जा सकती है।
सरकार ने एफसीआरए नियमावली, 2011 में कई बदलावों की घोषणा की है, जिनसे भारत में एनजीओ और दूसरे संगठनों के विदेशी पैसे लेने और इस्तेमाल करने के तरीके को लेकर जवाबदेही और कड़ी हो गई है।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप