अंकिता हत्याकांड में ठोस साक्ष्य सामने आने पर सरकार सीबीआई समेत किसी भी जांच को तैयार:भाजपा

अंकिता हत्याकांड में ठोस साक्ष्य सामने आने पर सरकार सीबीआई समेत किसी भी जांच को तैयार:भाजपा

अंकिता हत्याकांड में ठोस साक्ष्य सामने आने पर सरकार सीबीआई समेत किसी भी जांच को तैयार:भाजपा
Modified Date: January 5, 2026 / 09:57 pm IST
Published Date: January 5, 2026 9:57 pm IST

देहरादून, पांच जनवरी (भाषा) अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग पर चौतरफा घिरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को फिर दोहराया कि अगर ठोस साक्ष्य सामने आएं तो उत्तराखंड सरकार किसी भी तफ्तीश के लिए तैयार है।

यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए भाजपा के राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल ने कहा, “सीबीआई क्या, कोई भी जांच, जो आवश्यक होगी, कराई जाएगी लेकिन मामले में ठोस सबूत और तार्किक तथ्य सामने आने चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे अपने साक्ष्य जांच एजेंसी के सामने प्रस्तुत करें।

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भाजपा नेता ने कहा कि 2022 में इस दुखद घटना के सामने आते ही तत्काल आरोपियों को पकड़ा गया और एक महिला पुलिस उप महानिरीक्षक के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर तहकीकात की गयी और एक लंबी सुनवाई के बाद सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गयी।

बंसल ने कहा कि मुकदमे के दौरान अदालत में भी वीआईपी होने, घटनास्थल पर सबूतों से छेड़छाड़ जैसे तमाम विषय आए जिस पर अदालत ने इसकी संभावना को नकारा । उन्होंने कहा कि मामले को सीबीआई को सौंपे जाने की मांग से भी अदालतों ने इनकार किया।

उन्होंने अंकिता हत्याकांड जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर गैरजिम्मेदाराना राजनीति से प्रदेश का माहौल खराब करने का आरोप लगाया।

सांसद ने कहा, “ये सभी दल विशेषकर कांग्रेस इस मुद्दे में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं। ऐसा करने के प्रयास में वे न केवल प्रदेश की छवि और माहौल खराब कर रहे हैं बल्कि दिवंगत बेटी अंकिता की आत्मा को भी अपमानित करने का प्रयास कर रहे हैं।”

बंसल ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि सीबीआई पर पक्षपात और दवाब में काम करने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस अब उसी संस्था से जांच कराए जाने की मांग कर रही है ।

उन्होंने कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाते हुए यह भी आरोप लगाया कि कहीं यह अदालत में दोषी करार दिए गए अपराधियों को बचाने की कोशिश तो नहीं है क्योंकि सीबीआई जांच होने पर सजायाफ्ताओं को जमानत मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी ।

भाषा दीप्ति नोमान

नोमान


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