अयोध्या मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर सरकार श्वेत पत्र लाए: प्रशांत किशोर
अयोध्या मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर सरकार श्वेत पत्र लाए: प्रशांत किशोर
गया जी, चार सितंबर (भाषा) जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर शुक्रवार को केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार से श्वेत पत्र जारी करने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
बिहार के गया जी शहर में संवाददाताओं से बातचीत में किशोर ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों को लेकर जारी विवाद पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों की कठिनाइयां सरकार के उच्च आर्थिक वृद्धि दर के दावों से मेल नहीं खातीं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 के चुनाव अभियान के रणनीतिकार रह चुके किशोर से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी।
भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी मिश्रा ट्रस्ट के पहले सीईओ बनाए गए हैं। उनकी नियुक्ति मंदिर प्रबंधन में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद हुई है।
किशोर ने कहा, “केवल सीईओ नियुक्त कर देने से क्या होगा, यदि पहले प्रबंधन संभालने वाले लोगों को बिना जवाबदेही के छोड़ दिया जाए। भ्रष्टाचार के आरोपों से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। सरकार को अब तक हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं पर श्वेत पत्र लाना चाहिए।”
जीडीपी आंकड़ों पर पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव द्वारा उठाए गए सवालों के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “जीडीपी के अनुमानित आंकड़ों पर सवाल किसी विशेषज्ञ ने उठाए हैं और यह पहली बार नहीं है जब सरकार के आर्थिक वृद्धि दर के दावों पर विवाद हुआ हो।”
उन्होंने कहा, “हकीकत यह है कि देश की बड़ी आबादी रोजमर्रा की जिंदगी में भारी कठिनाइयों का सामना कर रही है। घोर गरीबी और बेरोजगारी सरकार के इस दावे के विपरीत है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जब तक लोगों के जीवन स्तर में सुधार नहीं होगा, तब तक इन दावों पर सवाल उठते रहेंगे।”
किशोर ने दोहराया कि जन सुराज पार्टी बिहार में राजनीति करने के तरीके में बुनियादी बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, “हम अपना संकल्प तभी पूरा कर पाएंगे, जब समाज की सोच बदलेगी। हमें ऐसे बहुत से लोग मिलते हैं जो सिद्धांततः जन सुराज के मुद्दों से सहमत होते हैं, लेकिन मतदान के समय आदतन धर्म और जाति के आधार पर वोट देते हैं।”
किशोर ने कहा कि बिहार को स्थायी पिछड़ेपन से बाहर निकालकर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की कुंजी शिक्षा क्षेत्र में सुधार है।
उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से बिहार में शिक्षा समाज की प्राथमिकता नहीं रह गई है। हम अभिभावकों की सोच बदलने का प्रयास कर रहे हैं और शिक्षकों को भी संगठित कर रहे हैं, ताकि वे बेहतर कार्य परिस्थितियों की नैतिक मांग तभी कर सकेंगे जब यह धारणा बने कि वे वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहे हैं।”
भाषा कैलाश अविनाश
अविनाश

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