आईएसआईएस से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित करने पर विचार करे सरकार: न्यायालय
आईएसआईएस से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित करने पर विचार करे सरकार: न्यायालय
नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि वे राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच वाले वर्ष 2021 के एक मामले में दिन-प्रतिदिन सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत गठित करने पर विचार करें। इस मामले में एक व्यक्ति के आईएसआईएस से संबंध होने का आरोप है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ मोहम्मद हिदायतुल्लाह की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर आरोप है कि उसने भारत में आतंकवादी समूह की विचारधारा का प्रचार करने और अन्य व्यक्तियों की भर्ती करने के लिए टेलीग्राम समूहों का इस्तेमाल किया।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मुकदमे में अत्यधिक देरी से आरोपी की ओर से यह वैध दलील दी जा सकती है कि उसे लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, वह भी बिना सुनवाई के।
पीठ ने सरकार और एनआईए की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से एक सप्ताह के भीतर इस मामले में विशेष अदालत गठित करने के बारे में जानकारी देने को कहा, जिसमें 125 गवाहों से पूछताछ की जानी है।
इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने एक अलग मामले में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को विशेष कानूनों के तहत मामलों के लिए अदालतें नहीं बनाने के लिए फटकार लगाई थी और कहा था कि मुकदमे की कार्यवाही में देरी के कारण अदालतों को आरोपियों को जमानत देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
आईएसआईएस से जुड़े एक मामले में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने आतंकी संगठन के कथित सदस्य हिदायतुल्लाह को साइबरस्पेस का उपयोग करके युवाओं के कट्टरपंथी बनाने से संबंधित मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था।
भाषा
प्रशांत पवनेश
पवनेश

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