नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि परीक्षा प्रणाली को लेकर देश में अविश्चास का माहौल है और सरकार को विपक्ष या अपने सहयोगी दलों को नहीं सुनना है तो कम से कम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की बात सुननी चाहिए।
उन्होंने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि सरकार को सच्चाई को स्वीकार करती हुए सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।
सुले का कहना था कि सत्ता में बैठे लोग समझ नहीं पा रहे है कि लोगों में विश्वास का अभाव है।
उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता छगन भुजबल के एक बयान का हवाला देते हुए कहा, ‘‘भुजबल जी ने कहा है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान ने 15 दिन पहले (शिक्षा मंत्री के पद से) इस्तीफा दे दिया होता तो यह स्थिति पैदा नहीं होती…यह जंतर-मंतर तक सीमित नहीं है, नासिक पुणे हर जगह है, यह एक इशारा है। अपने सहयोगियों तो सुनिए।’’
सुले ने यह भी कहा, ‘‘चलिए, अपने सहयोगी की नहीं सुन सकते तो कम से कम मुरली मनोर जोशी की सुनिए। उन्होंने कहा कि लड़कियों के साथ मारपीट होता देखकर दुख होता है। वह वरिष्ठ नेता और शिक्षा मंत्री रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आप एक एसआईटी बना कर यह पता लगाइए कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई का आदेश किसने दिया।’’
सुले ने कहा, ‘‘कोई यहां से कह रहा है कि विदेशी हाथ है। बच्चे यह मीम बना रहे हैं कि यह समोचा चीन के पैसे से आया है। यह चाय पाकिस्तान के पैसे से आया है…तेजस्वी सूर्या की तरह ये बच्चे बहुत स्मार्ट हैं।’’
उन्होंने महाराष्ट्र की एक लड़की का उल्लेख करते हुए कहा कि एक तस्वीर में वह पुलिस के सामने अकेले खड़ी दिख रही है। उन्होंने कहा, ‘‘उसकी हिम्मत देखिये। यह एक शानदार तस्वीर है। जिस लड़की को हमने पढ़ाया, उसमें ना बोलने की ताकत है।’’
राकांपा(शप) सांसद ने नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान थाने में हिरासत में रखे गए प्रदर्शनकारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां पुलिसकर्मी छात्रों को बोल रहे हैं कि ‘‘ज्यादा मत बोलना नहीं तो 50 ग्राम पाउडर डाल दूंगा और तुम्हारा जीवन बर्बाद हो जाएगा।’’
उन्होंने इस विधेयक पर विचार विमर्श करने के लिए सरकार से एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन करने की मांग की।
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