नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को सरकार पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने के बहाने अपने ‘‘वास्तविक एजेंडे यानी परिसीमन’’ को जबरन आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
तृणमूल ने कहा कि वह हमेशा से महिला आरक्षण का समर्थन करती रही है, लेकिन सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर देश का “राजनीतिक नक्शा बदलने” वाले विधेयक को जल्दबाजी में पारित नहीं कर सकती।
वर्ष 2029 के चुनावों में महिलाओं के लिए विधायी निकायों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने संबंधी विधेयकों पर संसद के 16 से 18 अप्रैल तक के सत्र में विचार किया जाएगा।
इसमें लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव शामिल है, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके साथ ही निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए परिसीमन अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव भी शामिल है।
तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर अपने पूर्व के भाषण का एक वीडियो साझा किया और महिलाओं के लिए आरक्षण के संबंध में अपनी पार्टी की लंबे समय से पैरवी को रेखांकित किया।
राज्यसभा में तृणमूल के नेता ओ ब्रायन ने याद दिलाया कि तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने 14 जुलाई, 1998 को ही संसद में यह मुद्दा उठाया था।
अपनी पार्टी के पिछले रिकॉर्ड पर प्रकाश डालते हुए, ओब्रायन ने तृणमूल द्वारा मैदान में उतारी गई और निर्वाचित महिला उम्मीदवारों के अनुपात की ओर इशारा करते हुए कहा कि पार्टी ने 2014 में 41 प्रतिशत टिकट महिलाओं को दिए थे और वर्तमान में महिला सांसदों की संख्या के मामले में पार्टी सबसे आगे है।
राज्यसभा में तृणमूल की उपनेता सागरिका घोष ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार विधानसभा चुनावों के ठीक बीच में संसद के विशेष सत्र में बिना गहन चर्चा के एक ऐसे विधेयक को जल्दबाजी में पारित नहीं करा सकती, जो 2011 की जनगणना (पंद्रह साल पुराने आंकड़ों) के आधार पर 2026 में भारत के राजनीतिक मानचित्र को बदल देगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मोदी-शाह को यह याद दिलाना होगा कि भारत एकदलीय लोकतंत्र नहीं है। मनमानी और दादागिरी संसदीय भावना के खिलाफ है।’
तृणमूल नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले ने सरकार पर ‘‘फर्जी और दुर्भावनापूर्ण एजेंडा’’ चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘वास्तव में, मोदी महिलाओं के नाम पर परिसीमन के अपने असली एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहते हैं।’’
भाषा आशीष नरेश
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