बड़ी तबाही टली; रूप नगर पुल का रोज़ाना स्कूल छात्र और लोग करते थे इस्तेमाल
बड़ी तबाही टली; रूप नगर पुल का रोज़ाना स्कूल छात्र और लोग करते थे इस्तेमाल
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) उत्तरी दिल्ली के रूप नगर इलाके में एक नाले पर बने 60 फुट लंबे जिस पुल के ढहने से मंगलवार सुबह एक महिला की मौत हो गयी, उस पुल को थोड़ी देर पहले ही पार करके सैकड़ों छात्र अपने-अपने विद्यालय गये थे। स्थानीय लोगों ने यह जानकारी दी।
स्थानीय निवासियों ने कहा कि यह त्रासदी कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी।
उन्होंने बताया कि यह पुल कम से कम सात सरकारी और निजी स्कूलों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग था और यह सुबह 9.30 बजे ढह गया। उन्होंने दावा किया कि अगर यह थोड़ा पहले गिरता, तो और भी कई लोग मारे जा सकते थे।
अधिकारियों ने बताया कि पुल को पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था और जनता के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुसार, बाधाओं के बावजूद पुल का नियमित रूप से उपयोग होता रहा, क्योंकि कोई सुविधाजनक वैकल्पिक मार्ग नहीं था।
यह गुड़ मंडी को रूप नगर से जोड़ता था और पास के सरकारी स्कूल जा रहे छात्रों के लिए लगभग 30 मिनट का समय और कम से कम एक किलोमीटर की दूरी कम करने वाला एक महत्वपूर्ण शॉर्टकट (कम दूरी वाला रास्ता) था।
स्थानीय लोग पास के बाजारों तक पहुंचने के लिए भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा कि वहां एक भी सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था, जो लोगों को पुल का इस्तेमाल करने से रोक सके।
विकास कुमार नामक एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘अवरोधकों के बावजूद, सुविधाजनक वैकल्पिक मार्ग के अभाव में पुल का नियमित रूप से इस्तेमाल होता रहा।’’
कुमार ने कहा कि उन्होंने इस मामले की शिकायत कई बार की थी।
स्थानीय निवासी नीता विपुल ने कहा, ‘‘अधिकतर छात्र अपने स्कूल पहुंचने के लिए पहले ही पुल पार कर चुके थे और लोग अपने घरों में थे, जिससे संभवतः सैकड़ों लोगों की जान जाने से बच गई।’’
पुलिस ने बताया कि मृतक महिला (50) के भिखारी होने का संदेह है, जो पुल के ढहने के वक्त एक सिरे के पास मौजूद थीं। बाद में उसका शव बचाव कर्मियों द्वारा नाले से बरामद किया गया।
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और दिल्ली पुलिस ने समन्वित बचाव अभियान चलाया। दमकल वाहनों को भी अभियान में लगाया गया।
पुलिस ने बताया कि यह पुल सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग का है और इसे पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। पुल पर अवरोधक लगा दिए गए थे और इसे आम जनता के लिए बंद कर दिया गया था।
इलाके के निवासी मयंक ने कहा, ‘‘हमने एक तेज आवाज सुनी और तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।’’ उन्होंने कहा, “पुल जर्जर हालत में था और आवागमन रोकने के लिए दोनों तरफ से अवरोधक लगा दिए गए थे। हालांकि, चेतावनियों के बावजूद लोग इसका इस्तेमाल करते रहे।”
स्थानीय लोगों ने कहा कि पुल के ढहने का समय शायद एक बड़ी त्रासदी को रोक गया, क्योंकि सुबह के शुरुआती घंटों में छात्र स्कूल पहुंचने के लिए पुल का इस्तेमाल सर्वाधिक करते हैं।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, ‘‘अगर यह पुल एक घंटा पहले ढह जाता, तो परिणाम और भी घातक हो सकता था।’’ उन्होंने कहा कि हर दिन सुबह सात से 8.30 बजे के बीच सैकड़ों छात्र इस पुल का उपयोग करते हैं।
भाषा सुरेश नरेश
नरेश

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