ग्रेट निकोबार परियोजना पारिस्थितिकी तबाही का एक नुस्खा है: रमेश
ग्रेट निकोबार परियोजना पारिस्थितिकी तबाही का एक नुस्खा है: रमेश
नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना पर एक पत्र लिखकर कहा कि वर्तमान स्वरूप में यह परियोजना ‘‘पारिस्थितिकी तबाही’’ का कारण बन सकती है।
कांग्रेस नेता इस परियोजना को लेकर लंबे समय से चिंता जता रहे हैं और उनका दावा है कि इससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर प्रभाव होगा और आदिवासी समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन होगा।
मंत्री को लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा कि देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर कोई दो राय नहीं हो सकती, लेकिन उन्होंने ग्रेट निकोबार परियोजना के आसपास इसकी रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कुछ उपाय सुझाये।
उन्होंने कहा कि नौसेना अधिकारियों ने अपने लेखों में ऐसे उपायों का प्रस्ताव दिया है और ये उपाय क्षेत्र की पारिस्थितिकी को अधिक नुकसान पहुंचाए बिना देश की रक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पत्र साझा करते हुए कहा, ‘‘पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री और जनजातीय कार्य मंत्री को पत्र लिखने के बाद मैंने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के संबंध में रक्षा मंत्री को भी पत्र लिखा है। रमेश पहले पर्यावरण मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने एक मई को ‘ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न’ शीर्षक से एक प्रेस नोट जारी किया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने 10 मई, 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री को लिखा था कि ये अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृतियों के बारे में ‘‘पूरी तरह से गलत तस्वीर’’ प्रस्तुत करते हैं, जो असल में बहुत ही संदिग्ध आधारों पर दी गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने 13 मई, 2026 को केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि ये अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया के तहत वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुपालन के संबंध में स्थिति को पूरी तरह से गलत तरीके से प्रस्तुत करते हैं, असल में यह प्रक्रिया संसद द्वारा आदिवासी समुदायों को दिए गए व्यक्तिगत और सामूहिक अधिकारों का भावना और शब्द दोनों स्तरों पर खुला उल्लंघन करती है।’’
उन्होंने सिंह को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘मैं अब आपको इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि यह परियोजना मूल रूप से एक व्यावसायिक उद्यम है और इससे होने वाले पारिस्थितिकी को नुकसान के कारण यह सार्वजनिक आलोचना का सामना कर रही है और इसे भारत सरकार द्वारा कथित तौर पर सर्वोपरि सुरक्षा कारणों के आधार पर उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि हमारे देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर कोई दो राय नहीं हो सकती। भारत की रणनीतिक क्षमताओं को विश्वसनीय तरीके से प्रदर्शित करने की जरूरत पर भी कोई मतभेद नहीं हो सकता।’’
रमेश ने सुझाव दिया, ‘‘फिर भी मैं आपके विचारार्थ निम्नलिखित बातें प्रस्तुत करना चाहता हूं। पहला – ग्रेट निकोबार द्वीपसमूह के कैंपबेल बे में आईएनएस बाज का की शुरुआत की गई। लेकिन मौजूदा रनवे की लंबाई को कम से कम तीन गुना बढ़ाने और एक नौसैनिक जेट्टी बनाने की योजनाएं लगभग पांच वर्षों से मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। इन परियोजनाओं के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव भी कम नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा, दूसरा- अंडमान और निकोबार कमान की ऐसी परिसंपत्ति भी हैं जो कई साल पहले बनाई गई थीं और जिनका विस्तार बहुत कम पर्यावरणीय लागत के साथ किया जा सकता है जिनमें आईएनएस करदीप, आईएनएस कोहासा, आईएनएस उत्क्रोश, आईएनएस जरावा और कार निकोबार वायुसेना स्टेशन शामिल है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘तीसरा- ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और टाउनशिप है जिनसे हमारे देश की सैन्य क्षमता किसी भी तरह से नहीं बढ़ती। फिर भी अब अचानक इन्हें सही ठहराने के लिए यही एक बड़ा आधार बनाकर पेश किया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अंत में मैं एक बार फिर दोहराना चाहता हूं कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना अपने मौजूदा स्वरूप में पारिस्थितिकी तबाही का नुस्खा है।’’
रमेश ने अपने पत्र में कहा, ‘‘मैं आपसे (रक्षा मंत्री) आग्रह करता हूं कि आप ऊपर बताए गए उन विकल्पों पर गंभीरता से विचार करें जिन्हें स्वयं नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी लेखनी में सुझाया है।’’
भाषा सुरभि अमित
अमित

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