आंबेडकर, आइंस्टीन और अन्य समकालीनों के साथ गांधी के मतभेदों की पड़ताल करती है गुहा की नयी पुस्तक

आंबेडकर, आइंस्टीन और अन्य समकालीनों के साथ गांधी के मतभेदों की पड़ताल करती है गुहा की नयी पुस्तक

आंबेडकर, आइंस्टीन और अन्य समकालीनों के साथ गांधी के मतभेदों की पड़ताल करती है गुहा की नयी पुस्तक
Modified Date: September 4, 2026 / 01:38 pm IST
Published Date: September 4, 2026 1:38 pm IST

नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) इतिहासकार रामचंद्र गुहा की नयी किताब ‘आर्ग्युमेंट्स विद गांधी’ महात्मा गांधी की विरासत को उनके समकालीनों के साथ हुए विचार-विमर्श और मतभेदों तथा बाद की पीढ़ियों पर उनके विचारों के प्रभाव के माध्यम से समझने का प्रयास करती है।

यह किताब गांधी को केंद्र में रखकर आधुनिक दुनिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों की पड़ताल करती है। इनमें राजनीतिक अत्याचार का विरोध, जाति, लैंगिक और नस्ल के आधार पर भेदभाव, धार्मिक सद्भाव, आर्थिक असमानता तथा पृथ्वी को नुकसान पहुंचाए बिना गरीबी दूर करने की चुनौती शामिल हैं।

यह किताब दो अक्टूबर को बाजार में आएगी।

प्रकाशक हार्परकॉलिन्स इंडिया के अनुसार, किताब में गांधी एक प्रभावशाली और विवादास्पद, दोनों ही रूप में सामने आते हैं जिनके अहिंसा, सामाजिक न्याय, धर्म और आर्थिक नीतियों पर विचारों को लोगों ने समर्थन भी दिया और आलोचनाएं भी कीं।

गुहा ने एक बयान में कहा, ‘‘मैं कई वर्षों से गांधी का अध्ययन कर रहा हूं और उनके जीवन को जितना समझने की कोशिश की उतना ही मुझे एहसास हुआ कि उनकी विरासत कितनी गहरे विवादों से जुड़ी थी। एक ऐसे व्यक्ति को, जिसे कभी ‘संत’ और कभी ‘राष्ट्रपिता’ कहा गया, लेकर सबसे तीखी बहसें हुईं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यही बहसें और उनकी आज भी बनी हुई प्रासंगिकता मेरी नई किताब का केंद्र हैं।’’

गुहा ने इससे पहले दो खंडों में महात्मा गांधी की विस्तृत जीवनी लिखी है।

अपनी नयी किताब में उन्होंने गांधी के बी आर आंबेडकर, वी डी सावरकर और जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रमुख लोगों के साथ मतभेदों की पड़ताल की है। साथ ही उन्होंने यह भी समझने की कोशिश की है कि अल्बर्ट आइंस्टीन, मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला जैसे लोगों के साथ गांधी के विचार कैसे जुड़े थे।

गुहा (68) ने कहा कि किताब में इस बात का भी जिक्र है कि कैसे भगत सिंह अहिंसा के मुद्दे पर, आंबेडकर जाति के विषय पर, सावरकर धर्म के मुद्दे पर और नेहरू आर्थिक नीतियों को लेकर गांधी से असहमत थे।

हार्परकॉलिन्स इंडिया की कार्यकारी प्रकाशक पौलोमी चटर्जी ने कहा कि गांधी पर गुहा की पहले की जीवनियां अपनी गहराई और शोध के लिए उल्लेखनीय हैं, जबकि नयी किताब उन पुस्तकों से आगे बढ़कर गांधी के विचारों की दुनिया की पड़ताल करती है।

भाषा शोभना वैभव

वैभव


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