(कुमार आंनद)
अहमदाबाद, 11 जून (भाषा) अहमदाबाद में एअर इंडिया विमान दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के एक वर्ष बीत जाने के बाद भी गुजरात के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक उस भयावह दिन की बुरी स्मृतियों से उबर नहीं पाए हैं और उसे अपने पूरे करियर का ‘‘सबसे पीड़ादायक’’ अध्याय बताते हैं।
मलिक के मन में उक्त हादसा केवल उसके व्यापक प्रभाव के कारण ही नहीं, बल्कि मलबे से निकाले गए जले हुए शवों की भयावह तस्वीरों के कारण भी गहराई से अंकित है।
हालांकि, उस दुखद घटना के बीच उन्हें आपातकालीन प्रतिक्रिया की असाधारण गति और सटीकता भी याद है। मलिक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि दुर्घटना के बाद का डीएनए मिलान अभियान संभवतः दुनिया में अब तक का सबसे तेज पहचान प्रक्रियाओं में से एक था।
उन्होंने कहा कि हादसे के मात्र 30 मिनट के भीतर 500 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि दमकल वाहनों और एम्बुलेंस की निर्बाध आवाजाही के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाया गया था तथा सुरक्षा व्यवस्था तत्काल सुदृढ़ की गई थी। उन्होंने आपदा के बीच कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन के साथ काम करने वाले आपातकालीन सेवाकर्मियों की सराहना की।
मलिक ने कहा कि संभवतः पहली बार मृतकों के परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डीएनए रिपोर्ट, प्राथमिकी की प्रति और पंचनामा रिपोर्ट सहित सभी आवश्यक दस्तावेज मौके पर ही उपलब्ध कराए गए, ताकि उन्हें बीमा दावों या अन्य कानूनी औपचारिकताओं के लिए बाद में दोबारा नहीं आना पड़े।
गत वर्ष 12 जून को लंदन जा रही एअर इंडिया की उड़ान एआई-171 अपराह्न 1.41 बजे अहमदाबाद हवाई अड्डे के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों समेत कुल 260 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में हादसे के स्थल के पास स्थित एक चिकित्सा संस्थान में मौजूद 19 अन्य लोग भी शामिल थे।
उस समय अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त रहे मलिक ने कहा कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता मृतकों के परिजनों को यथाशीघ्र सही पहचान करके उनके प्रियजनों के शव सौंपना था और इस दिशा में कार्य बेहद तेजी से किया गया। उन्होंने कहा कि डीएनए पहचान और शवों को परिजनों को सौंपने की पूरी प्रक्रिया जिस गति से संपन्न की गई, वह उल्लेखनीय थी।
मलिक ने कहा, ‘‘पूरी प्रक्रिया अत्यंत सुचारू रही और इसमें शामिल सभी एजेंसियों के बीच समन्वय तथा सहयोग उत्कृष्ट था। हालांकि, यह मेरे पूरे करियर की सबसे पीड़ादायक घटना है।’’
उन्होंने बताया कि दुर्घटना के दो मिनट के भीतर ही नियंत्रण कक्ष से उन्हें हादसे की सूचना मिल गई थी। मलिक ने कहा, ‘‘मैं तुरंत रवाना हुआ और 10 से 15 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच गया। वहां पहुंचने तक पुलिस बल, दमकल विभाग और अन्य आपातकालीन सेवाएं पहले ही मौके पर मौजूद थीं।’’
उन्होंने कहा कि घटनास्थल से जले हुए शवों को निकाले जाते देखना ‘‘बेहद पीड़ादायक’’ था। डीजीपी ने कहा कि आधे घंटे के भीतर 500 से अधिक पुलिसकर्मी मौके पर तैनात कर दिए गए थे, जिन्होंने दमकल वाहनों और एम्बुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया, यातायात को अन्य मार्गों पर मोड़ा और दुर्घटनास्थल की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की।
उन्होंने कहा, ‘‘नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण था। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने की थी कि मृतकों के परिजनों को सही पहचान करके शव जल्द से जल्द सौंपे जाएं।’’
मलिक ने कहा कि इसके लिए अधिकारियों ने डीएनए परीक्षण प्रणाली का उपयोग किया, जिससे परिजनों के नमूनों का मृतकों के नमूनों से त्वरित मिलान करके शव सौंपे जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘संभवतः यह अपने प्रकार का दुनिया के सबसे तेज अभियानों में से एक था। उदाहरण के तौर पर, दुर्घटना 12 जून को अपराह्न 1.41 बजे हुई और उसी दिन रात 8.30 बजे तक हमने 51 परिजनों के नमूने अहमदाबाद स्थित डीएनए प्रयोगशाला को भेज दिए थे। यानी हादसे के सात घंटे के भीतर नमूने एकत्र कर लिए गए थे।’’
उन्होंने बताया, ‘‘रात 12 बजकर 19 मिनट पर, यानी हादसे के 11 घंटे से भी कम समय बाद, जले हुए शवों से लिए गए पहले डीएनए नमूने गांधीनगर भेज दिए गए थे।’’
मृतकों के डीएनए नमूनों की जांच मुख्य रूप से गांधीनगर में की गई, जबकि परिजनों के नमूनों का परीक्षण अहमदाबाद में हुआ।
मलिक ने कहा, ‘‘काम इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि डीएनए परीक्षण के बिना पहचाना गया पहला शव, जो दुर्घटनास्थल पर मिला था, 13 जून की सुबह 8.30 बजे परिजन को सौंप दिया गया। यह कार्य हादसे के 20 घंटे से भी कम समय में पूरा कर लिया गया था।’’
उन्होंने कहा कि सामान्य सड़क दुर्घटना के मामलों में भी शव परिजन को सौंपने में आमतौर पर पूरा एक दिन लग जाता है।
डीजीपी ने कहा, ‘‘हमने यह कार्य इससे कहीं अधिक तेजी से किया। डीएनए मिलान के बाद पहला शव 14 जून को अपराह्न 3.19 बजे सभी औपचारिकताएं पूरी कर परिजन को सौंप दिया गया। यह हादसे के 50 घंटे से भी कम समय बाद हुआ था।’’
मलिक ने बताया कि मृतकों के परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पहचान संबंधी अभिलेख, डीएनए रिपोर्ट, प्राथमिकी की प्रति, स्टेशन डायरी की प्रविष्टि तथा पंचनामा रिपोर्ट जैसे सभी आवश्यक दस्तावेज घटनास्थल पर ही उपलब्ध करा दिए गए थे।
उन्होंने कहा कि संभवतः पहली बार दस्तावेजों की यह व्यवस्था मौके पर की गई, ताकि परिजनों को बीमा दावों और अन्य औपचारिकताओं के लिए कागजात लेने बाद में दोबारा नहीं आना पड़े।
भाषा अमित वैभव
वैभव