गुजरात: ईडी ने अदालत को बताया, पूर्व जिलाधिकारी रिश्वत का 50 प्रतिशत हिस्सा लेते थे
गुजरात: ईडी ने अदालत को बताया, पूर्व जिलाधिकारी रिश्वत का 50 प्रतिशत हिस्सा लेते थे
अहमदाबाद, चार जनवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा धन शोधन के एक मामले की जांच में पता चला कि आईएएस अधिकारी और सुरेंद्रनगर के पूर्व जिलाधिकारी राजेंद्रकुमार पटेल ने भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) आवेदनों को मंजूरी देने के लिए 5 रुपये से 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक रिश्वत की दर तय की थी।
ईडी ने दो जनवरी को अहमदाबाद की एक विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल रिमांड याचिका में कहा कि सीएलयू आवेदनों पर तेजी से कार्रवाई के लिए रिश्वत की मांग की जाती थी। रिश्वत की रकम गुजरात में जिलाधिकारी के कार्यालय से संचालित मध्यस्थों के एक नेटवर्क के माध्यम से भेजी जाती थी।
अदालत ने पटेल को सात जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
डिजिटल साक्ष्य के अनुसार, रिश्वत वसूली का हिसाब-किताब रखा जाता था और समय-समय पर जिलाधिकारी के निजी सहायक को भेजा जाता था।
अब तक की जांच में 800 से अधिक सीएलयू आवेदनों का पता चला है, जिनमें कथित तौर पर रिश्वत दी गई। इस तरह 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अपराध के जरिये एकत्र की गई।
ईडी ने कहा कि 2015 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी और सुरेंद्रनगर के तत्कालीन जिलाधिकारी पटेल सीएलयू मंजूरी से जुड़े रिश्वतखोरी के धन शोधन रैकेट में मुख्य लाभार्थी और अंतिम निर्णय लेने वाले व्यक्ति थे।
ईडी द्वारा उप मामलतदार (राजस्व अधिकारी) चंद्रसिंह मोरी की गिरफ्तारी के बाद, पिछले हफ्ते पटेल का तबादला कर दिया गया था लेकिन उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई।
संघीय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करने के बाद पटेल, मोरी और अन्य लोगों से जुड़े कथित धन शोधन की जांच शुरू की।
पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों से रिश्वत की रकम के कथित बंटवारे की एक तय व्यवस्था का संकेत मिलता है। याचिका में कहा गया कि कुल रिश्वत राशि में से 50 प्रतिशत पटेल को मिली, 10 प्रतिशत एक बिचौलिए ने रख ली और शेष राशि जिलाधिकारी कार्यालय के अन्य अधिकारियों में बांट दी गई।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश

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