भावनगर, एक सितंबर (भाषा) गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब त्रासदी के सिलसिले में एक पुलिस आरक्षी को गिरफ़्तार किया गया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 39 हो गई है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
इस त्रासदी में 13 लोगों की जान चली गयी थी।
राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (एसएमसी) ने एक बयान में कहा कि वेलावदार भाल थाने के आरक्षी राजदीपसिंह गोहिल को हिरासत में लिया गया है क्योंकि जांच में पाया गया कि वह मुख्य आरोपी गौतम सोलंकी के लगातार संपर्क में थे और इस अपराध में उसकी मदद की थी।
एसएमसी ने बताया कि पहले गिरफ्तार किए गए 38 आरोपियों में से 14 अभी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि 24 पुलिस हिरासत में हैं।
एसएमसी गुजरात पुलिस की खास इकाई है जो पूरे राज्य में अवैध शराब और जुए के धंधों पर नज़र रखती है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और मद्य निषेध अधिनियम के तहत गैर-इरादतन हत्या, आपराधिक साजिश, मिलावट और जहर देने जैसे आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।
भारत में बनी विदेशी शराब के एक प्रसिद्ध ब्रांड के लेबल वाली बोतलों में भरी जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत हो गई थी।
यह मामला तब सामने आया जब 16 अगस्त की रात वारतेज में तीन दोस्तों ने शराब पी। तीनों की तबीयत खराब हो गई और उनमें से एक की मौत हो गई।
पहले पीड़ित, उपेंद्रसिंह गोहिल के रक्त नमूने की जांच में मेथनॉल पाया गया। इसके बाद और भी मौतें हुईं तथा कई लोगों को गंभीर जटिलताओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
अधिकारियों के मुताबिक, मेथनॉल बहुत ज़हरीला रसायन है और 67 लोगों ने मेथनॉल वाली शराब पी थी।
गुजरात एक शराब-मुक्त राज्य है, जहां शराब बनाने, बेचने और पीने पर रोक है।
पुलिस के अनुसार यह जहरीली शराब वरतेज के गौतम सोलंकी के घर पर रईस की मदद से बनाई गई थी। रईस को मध्यप्रदेश के उज्जैन में हिरासत में लिया गया था।
वारतेज थाने में 19 अगस्त को दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक रईस और उज्जैन से आए उसके सहयोगी जुबेर ने अहमदाबाद से कच्चा माल मंगवाया और सोलंकी के घर पर जहरीली शराब बनाई।
उन्होंने इस गैर-कानूनी धंधे में मध्यप्रदेश के ही नरेंद्र यादव को भी शामिल किया।
पुलिस ने बाद में बताया कि यादव की मौत उसी शराब को पीने से हुई, जिसे उसने खुद बनाया था।
भाषा
राजकुमार अविनाश
अविनाश