मिजो महिला की याचिका पर न्यायालय ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने को कहा
मिजो महिला की याचिका पर न्यायालय ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने को कहा
नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मिजो विवाह और संपत्ति उत्तराधिकार कानून में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली एक मिजो महिला से सोमवार को इस मामले में गुवाहाटी उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता मरियम एल. ह्रांगछाल की ओर से पेश वकील से कहा कि जब संबंधित क्षेत्र में उच्च न्यायालय पहले से है, तो मामले की सुनवाई के लिए दिल्ली आने की जरूरत नहीं है।
पीठ ने कहा, ‘‘आप उच्च न्यायालय का रुख क्यों नहीं करते? उच्च न्यायालयों की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई है। इस महिला पर इतना बोझ न डालें कि उन्हें इस मामले की पैरवी के लिए दिल्ली की यात्रा करनी पड़े। इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करें।’’
याचिका में ‘मिजो विवाह और संपत्ति उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के जरिए किए गए संशोधनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह कानून गैर-मिजो पुरुषों से विवाह करने वाली मिजो महिलाओं के साथ भेदभाव करता है और उनके बच्चों के अधिकारों को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।
नए कानून में प्रथागत कानून को और अधिक संहिताबद्ध किया गया है तथा 2014 के मूल अधिनियम को मजबूत किया गया है जिसमें बहुविवाह, अंतर-समुदाय विवाह और महिलाओं के संपत्ति अधिकारों से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं।
हालांकि, इस अधिनियम में बहुविवाह पर पहली बार प्रतिबंध लगाया गया है और महिलाओं को वैवाहिक संपत्ति में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार दिया गया है, लेकिन इसके एक प्रावधान की व्याख्या को लेकर विवाद खड़ा हो गया है जिसमें गैर-मिजो पुरुषों से विवाह करने वाली मिजो महिलाओं की मिजो पहचान और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा समाप्त होने की आशंका जताई गई है।
भाषा
खारी वैभव
वैभव

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