चंडीगढ़, 15 अप्रैल (भाषा) पारिस्थितिक स्थिरता और जलवायु-अनुकूल शासन की दिशा में आगे बढ़ते हुए हरियाणा सरकार ने एक ऐसी योजना को मंजूरी दी है, जिसमें बड़े पैमाने पर पौधारोपण, नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना, वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को शामिल किया गया है।
हरियाणा के हरित आवरण और पारिस्थितिक लचीलेपन को मजबूत करने की बहुआयामी रणनीति को दर्शाते हुए प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के तहत 298.43 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी वार्षिक संचालन योजना (एपीओ) को मंजूरी दी गई।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह निर्णय मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई 10वीं संचालन समिति की बैठक में लिया गया जो हाल के वर्षों में राज्य की सबसे व्यापक वन एवं पर्यावरण कार्य योजनाओं में से एक है।
रस्तोगी ने बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया कि स्वीकृत एपीओ केवल एक वित्तीय कवायद नहीं है बल्कि हरियाणा के पर्यावरणीय भविष्य में एक रणनीतिक निवेश है।
बयान के अनुसार, उन्होंने परिणामों, जवाबदेही और समय पर क्रियान्वयन के महत्व पर जोर दिया।
कैम्पा के सीईओ डॉ. नवदीप सिंह ने बैठक को सूचित किया कि योजना के केंद्र में एक व्यापक पौधारोपण कार्यक्रम है जिसके तहत 1,882 हेक्टेयर भूमि पर 20 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे।
इसके अलावा 4,518 हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूदा वृक्षारोपण का रखरखाव किया जाएगा जिससे पहले से लगाए गए पेड़ों की स्थिरता और अस्तित्व सुनिश्चित हो सके।
शहरी प्रदूषण और भीषण गर्मी से निपटने के लिए राज्य सरकार 16 हेक्टेयर क्षेत्र में मियावाकी तकनीक (छोटे शहरी क्षेत्रों के बीच घने लघु वन बनाने की एक जापानी तकनीक) का उपयोग करके सघन शहरों में वन विकसित करेगी। इन सघन, तेजी से बढ़ने वाले वनों से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हरियाली में उल्लेखनीय वृद्धि होने के साथ-साथ वायु गुणवत्ता में भी सुधार होने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने बताया कि हरित शासन की दिशा में एक अग्रणी कदम के रूप में हरियाणा सरकार 22 जिलों में स्थित वन कार्यालयों में 15 किलोवाट सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने की योजना बना रही है।
भाषा सुरभि माधव
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