उच्च न्यायालय ने मोदी पर टिप्पणी को लेकर निलंबित ‘एक्स’ खाते को बहाल करने की अनुमति दी
उच्च न्यायालय ने मोदी पर टिप्पणी को लेकर निलंबित ‘एक्स’ खाते को बहाल करने की अनुमति दी
नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने को लेकर निलंबित किए गए एक ‘एक्स’ अकाउंट को बहाल करने की अनुमति दे दी है।
हालांकि, न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) को केंद्र की अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा निर्णय लिये जाने तक, अपने प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक पोस्ट को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता प्रतीक शर्मा के ‘पैरोडी’ ट्विटर अकाउंट, डॉ नीमो यादव को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत 18 मार्च को जारी किए गए आदेश के परिणामस्वरूप ब्लॉक कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता कथित आपत्तिजनक ट्वीट हटाने के लिए तैयार हैं और इसके एवज में उनका ‘एक्स’ अकाउंट बहाल किया जाए।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र सरकार ने याचिकाकर्ता को एक पत्र जारी कर उन्हें इस मामले की समीक्षा के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति के समक्ष सुनवाई का अवसर दिया है।
न्यायमूर्ति कौरव ने 6 अप्रैल को दिये आदेश में कहा, ‘‘यह निर्देश दिया जाता है कि ब्लॉक करने संबंधी आदेश में उल्लेखित कथित आपत्तिजनक ट्वीट को अस्थायी रूप से ब्लॉक/निलंबित किया जाए। कथित आपत्तिजनक ट्वीट को ‘एक्स’ द्वारा अस्थायी रूप से ब्लॉक/निलंबित किए जाने के बाद, याचिकाकर्ता का सोशल मीडिया अकाउंट तुरंत बहाल किया जाए।’’
अदालत ने याचिकाकर्ता को केंद्र के पत्र का जवाब देने और समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया, और यदि आवश्यक हो, तो अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा प्रतिनिधित्व या साथ आने का अनुरोध करने को कहा।
उच्च न्यायालय ने कहा कि समिति याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सभी दलीलों पर विचार करेगी, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या कथित आपत्तिजनक ट्वीट कानूनन जायज थे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता की शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो उन्हें कानून के अनुसार उचित उपाय करने की छूट होगी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि मंत्रालय याचिकाकर्ता के ‘एक्स’ अकाउंट पर पोस्ट की गई सामग्री की निगरानी करने और किसी भी आपत्तिजनक सामग्री के मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने के लिए भी स्वतंत्र होगा।
भाषा सुभाष सुरेश
सुरेश

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