प्रयागराज, 17 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने दहेज के लिए हत्या के मामलों में जमानत देने को लेकर उच्चतम न्यायालय की कथित टिप्पणी पर आपत्ति जताई है।
मीडिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि किसी न्यायाधीश का जमानत देने का दृष्टिकोण संदिग्ध है, जो अनुचित है।
उन्होंने उस रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि उच्चतम न्यायालय ने दहेज हत्या के 510 मामलों में से 508 में जमानत देने पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की आलोचना की है।
पांडेय ने कहा कि न्यायाधीशों के निर्णय में भिन्नता स्वाभाविक है—कुछ सख्त होते हैं तो कुछ उदार। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई न्यायाधीश अधिकांश मामलों में जमानत अर्जी खारिज कर दे, तो क्या उसे भी संदेह के दायरे में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियां न्यायाधीशों की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं तथा इससे न्यायाधीशों में भय का वातावरण बनता है, जिसका नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है।
पांडेय ने कहा कि अधिकांश नागरिकों के लिए उच्च न्यायालय ही अंतिम अदालत होता है, क्योंकि जमानत याचिका खारिज होने के बाद सभी लोग उच्चतम न्यायालय तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने ऐसी टिप्पणियों को अनुचित परंपरा बताते हुए इस पर आत्मचिंतन की आवश्यकता जताई।
भाषा
राजेंद्र रवि कांत