उच्च न्यायालय ने दोस्तों के बीच झगड़े से जुड़ी प्राथमिकी रद्द की, सामुदायिक सेवा का निर्देश दिया

उच्च न्यायालय ने दोस्तों के बीच झगड़े से जुड़ी प्राथमिकी रद्द की, सामुदायिक सेवा का निर्देश दिया

उच्च न्यायालय ने दोस्तों के बीच झगड़े से जुड़ी प्राथमिकी रद्द की, सामुदायिक सेवा का निर्देश दिया
Modified Date: September 6, 2026 / 05:50 pm IST
Published Date: September 6, 2026 5:50 pm IST

नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दोस्तों के बीच हुए झगड़े के बाद दर्ज प्राथमिकी को रद्द करते हुए दोनों पक्षों को मणिपुर के एक अस्पताल में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने यह निर्देश दोनों पक्षों के बीच विवाद सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझ जाने के बाद दिया।

उच्च न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता और दोनों आरोपी अब भी दोस्त हैं तथा उनके बीच अभी कोई मौजूदा शिकायत नहीं है। अदालत ने कहा कि मामले में दोषसिद्धि की संभावना अत्यंत कम है और आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने 21 अगस्त को पारित आदेश में कहा, ‘‘…मेरी राय में प्राथमिकी रद्द करने की मांगी गई राहत को सामुदायिक सेवा करने और उपयुक्त मुआवजे का भुगतान करने की शर्त के अधीन करना उचित होगा। याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संख्या चार (दोनों आरोपी) मणिपुर के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में दो-दो घंटे के कुल छह सत्रों में सामुदायिक सेवा करेंगे।’’

अदालत ने कहा कि दोनों दोस्तों को अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के समक्ष रिपोर्ट करना होगा, जो उन्हें उपयुक्त कार्य सौंपेंगे। अदालत ने कहा कि सामुदायिक सेवा शुरू होने की तारीख से दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। अदालत ने कहा कि इसके बाद चिकित्सा अधीक्षक अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करेंगे, जिसे अदालत के रिकॉर्ड में डाला जाएगा।

अदालत ने दोनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन को सामूहिक रूप से 10,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश भी दिया।

अदालत ने यह आदेश यहां डाबड़ी थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के अनुरोध संबंधी याचिका मंजूर करते हुए दिया।

पिछले साल मार्च में एक व्यक्ति की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वह अपने दोस्त के साथ किराये के फ्लैट में रह रहा था और दोनों आरोपियों ने जबरन परिसर में प्रवेश करके उसके तथा उसके दोस्त के साथ मारपीट की।

प्राथमिकी में कहा गया था कि पीड़ितों में से एक को कथित तौर पर लात और घूंसे मारे गए, जिससे वह सिर के बल रसोई के स्लैब पर गिर गया और उसके सिर में चोट आई।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्राथमिकी में किसी आग्नेयास्त्र या धारदार हथियार के इस्तेमाल का आरोप नहीं था और न ही सिर में चोट पहुंचाने के उद्देश्य से कोई अलग कृत्य किए जाने का उल्लेख था।

अदालत को बताया गया कि पक्षों ने बिना किसी दबाव या अनुचित प्रभाव के विवाद सुलझा लिया है और सुलहनामा पर हस्ताक्षर किए हैं।

घायल व्यक्ति ने भी अदालत को बताया कि वह अपनी चोट से उबर चुका है और उसे इसका कोई स्थायी दुष्प्रभाव नहीं है। पक्षों ने कहा कि वे अब भी दोस्त हैं और एक-दूसरे के खिलाफ उनकी कोई मौजूदा शिकायत नहीं है।

अदालत ने प्राथमिकी रद्द करते हुए कहा कि पक्षों के बीच विवाद दोस्तों के बीच हुए झगड़े से पैदा हुआ था और प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ समय बाद ही उसका समाधान हो गया था।

अदालत ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा और इससे दोनों पक्षों के बीच मतभेद तथा रंजिश बनी रहेगी। इसलिए, न्याय के हित में कार्यवाही को समाप्त करना बेहतर होगा।’’

भाषा

अमित सुभाष

सुभाष


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