‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करना हमारे न्याय क्षेत्र के बाहर: अदालत

‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करना हमारे न्याय क्षेत्र के बाहर: अदालत

‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करना हमारे न्याय क्षेत्र के बाहर: अदालत
Modified Date: January 29, 2026 / 04:05 pm IST
Published Date: January 29, 2026 4:05 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने फैसले में कहा कि शाहरुख खान के स्वामित्व वाली रेड चिलीज एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ सीरीज के खिलाफ भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी समीर वानखेड़े की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई करना उसके न्याय क्षेत्र के दायरे में नहीं आता।

मुकदमे पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि मामले में सभी पक्षकार मुंबई में रहते हैं और कथित अपराध भी वहीं हुआ था और इसलिए मुंबई की अदालतों के पास इस तरह की याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार है।

न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि वानखेड़े इस मामले पर अधिकार क्षेत्र रखने वाली अदालत के समक्ष अपनी याचिका दायर कर सकते हैं।

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘इस मुकदमे की सुनवाई केवल मुंबई की अदालतों के न्याय क्षेत्र में आती हैं। इस वाद पर सुनवाई करना इस न्यायालय के न्याय क्षेत्र के दायरे में नहीं आता; इसलिए इसे वादी को वापस लौटाया जा रहा है ताकि अगर वह चाहें तो इसे किसी सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकें। यदि कोई आवेदन लंबित है तो उसे निस्तारित माना जाए।’’

वानखेड़े के अनुसार, वेब सीरीज में ‘मानहानिकारक सामग्री’ उनसे व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने और 2021 के मादक पदार्थ तस्करी मामले में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी का बदला लेने के इरादे से डाली गई थी।

वानखेड़े ने आरोप लगाया कि शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान द्वारा लिखित और निर्देशित यह वेब सीरीज उन्हें निशाना बनाने और बदनाम करने के लिए रची गई थी।

वानखेड़े ने रेड चिलीज और नेटफ्लिक्स पर मानहानि का मुकदमा दायर करते हुए दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है, जिसे वह कैंसर रोगियों के लिए टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल को दान करना चाहते हैं।

वानखेड़े ने अपने मुकदमे में दावा किया कि ‘‘सत्यमेव जयते’’ राष्ट्रीय प्रतीक का हिस्सा है और सीरीज में एक पात्र ‘‘सत्यमेव जयते’’ का नारा लगाने के बाद अश्लील इशारा करते दिखता है।

याचिका में कहा गया है कि यह कृत्य राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के प्रावधानों का गंभीर और संवेदनशील उल्लंघन है, जिसके लिए कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और ओटीटी (ओवर दी टॉप) मंच नेटफ्लिक्स ने मुकदमे का विरोध करते हुए कहा कि इसमें क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार का अभाव है और मुकदमा दिल्ली के बजाय मुंबई में दायर किया जाना चाहिए था।

नेटफ्लिक्स ने दलील दी कि यह कार्यक्रम फिल्म उद्योग की संस्कृति पर एक व्यंग्य और ‘डार्क कॉमेडी’ है और मानहानि के मुकदमे में इस पर रोक नहीं लगाई जा सकती। उसने कहा कि अधिकारी को डेढ़ मिनट के व्यंग्य दृश्य को लेकर ‘‘अति संवेदनशील’’ नहीं होना चाहिए।

रेड चिलीज एंटरटेनमेंट ने यह भी दावा किया कि अधिकारी ने अपनी सुविधा के अनुसार अदालतों का चयन किया और दिल्ली के बजाय इसे मुंबई में दायर किया जाना चाहिए था क्योंकि वानखेड़े वहीं रहते हैं और कंपनी का पंजीकृत कार्यालय भी मुंबई में है।

सीरीज की विषयवस्तु के बारे में रेड चिलीज ने कहा कि कार्यक्रम में हिंदी फिल्म उद्योग के विभिन्न विवादों जैसे भाई-भतीजावाद, पैपराजी (फोटोग्राफर) संस्कृति, व्यभिचार और नवोदित अभिनेताओं के संघर्षों को व्यंग्य और ‘पैरोडी’ में पेश किया गया है।

कंपनी ने कहा कि ‘‘व्यंग्य’’ को कलात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक टिप्पणी का एक वैध रूप माना गया है और कानून में इसकी अनुमति दी गई है।

भाषा सुरभि नरेश

नरेश


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