अधीनस्थ न्यायपालिका को धन आवंटित नहीं करने पर दिल्ली सरकार को उच्च न्यायालय की फटकार

अधीनस्थ न्यायपालिका को धन आवंटित नहीं करने पर दिल्ली सरकार को उच्च न्यायालय की फटकार

अधीनस्थ न्यायपालिका को धन आवंटित नहीं करने पर दिल्ली सरकार को उच्च न्यायालय की फटकार
Modified Date: November 29, 2022 / 08:10 pm IST
Published Date: October 21, 2020 12:47 pm IST

नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायपालिका को सहायक कर्मियों की भर्ती के उद्देश्य से कोष की मंजूरी के लिए ‘‘दर-दर भटकाने’’ के कारण बुधवार को दिल्ली सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या सरकार चाहती है कि न्यायिक अधिकारी ‘चौपाल’ पर बैठकर अपना काम करें।

उच्च न्यायालय ने ध्यान दिलाया कि आने वाले कुछ महीनों में 150 न्यायिक अधिकारी पद ग्रहण करने वाले हैं लेकिन बिना सहायक कर्मियों के उनकी अदालतें कार्य नहीं कर सकती हैं।

उच्च न्यायालय ने सरकार के प्रशासनिक विभाग को भर्ती के लिए विलंब किए बिना 2.52 करोड़ रुपये की राशि जिला अदालतों को आवंटित करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यिम प्रसाद की पीठ ने कहा कि इस राशि का बोझ उच्च न्यायालय के कोष पर पड़ रहा है क्योंकि सरकार यह राशि मुहैया नहीं कर रही है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि यह राशि आप सरकार उच्च न्यायालय को 31 दिसंबर को या उससे पहले लौटाएगी।

पीठ ने कहा, ‘‘150 न्यायिक अधिकारी अदालतों में स्थनांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शुक्रगुजार हैं कि न तो सहयोग है और न कर्मचारी। दिल्ली सरकार प्रतिनियुक्ति पर कर्मचारियों को जिला अदालत में भेजे या क्या वह चाहती है कि न्यायाधीश चौपाल पर बैठकर सुनवाई करें।’’

पीठ ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका ने इस संबंध में कुछ नहीं किया क्योंकि वह दिल्ली सरकार द्वारा कोष जारी करने का धैर्य से प्रतीक्षा करती रही। अदालत ने कहा, ‘‘आपने (दिल्ली सरकार) कुछ नहीं किया, संभवत: आपने इसे कमजोरी के रूप में लिया।’’

अदालत ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार हो रही है और शीर्ष अदालत को जानने दीजिए कि दिल्ली सरकार द्वारा इस प्रक्रिया का कितने प्रतिकार का सामाना करना पड़ा।

पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा, ‘‘शुक्र है कि उच्च न्यायालय के पास अपना कोष है। आपने तो अधीनस्थ न्यायपालिका को कोष के लिए दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया।’’

भाषा धीरज माधव

माधव


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