प. बंगाल की आवास योजना का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग आवास’ किया गया: शुभेंदु
प. बंगाल की आवास योजना का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग आवास’ किया गया: शुभेंदु
कोलकाता, छह अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि राज्य मंत्रिमंडल ने आवास योजना ‘बांग्लार बाड़ी’ का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग आवास’ कर दिया है और 10 लाख से अधिक लाभार्थियों को वित्तीय सहायता की अंतिम किस्त जारी कर दी गई है।
राज्य सचिवालय नबान्न में योजना के तहत राशि की दूसरी और अंतिम किस्त जारी करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 10,20,379 लाभार्थियों को आवास योजना के तहत 60-60 हजार रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत कुल 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का परिव्यय शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमने मंत्रिमंडल में फैसला किया है कि ‘बांग्लार बाड़ी’ को अब ‘पश्चिम बंग आवास’ के नाम से जाना जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि अक्टूबर में दुर्गा पूजा उत्सव के बाद कई लाख नए लाभार्थियों को योजना की पहली किस्त जारी की जाएगी।
योजना के तहत लाभार्थियों को घर बनाने के लिए दो किस्तों में कुल 1.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।
अधिकारी ने कहा कि योजना के तहत करीब 20 लाख नए आवेदकों को पहले ही पंजीकृत किया जा चुका है और आगे भी और नाम जोड़े जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंग नाम के साथ एक बड़ा ऐतिहासिक महत्व जुड़ा है। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय इसे पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की साजिश रची गई थी, जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में विफल कर दिया गया।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने यह भी फैसला किया है कि राज्य के नाम से ‘‘पश्चिम’’ शब्द नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को इसके पीछे के ऐतिहासिक कारणों की जानकारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान यह आवास योजना प्रत्येक लाभार्थी को 25,000 रुपये प्रदान करती थी और उसे उस समय इंदिरा आवास योजना के नाम से जाना जाता था। उन्होंने कहा, ‘‘2004 से 2014 के बीच इस योजना के तहत पश्चिम बंगाल को 4,664 करोड़ रुपये मिले थे।’’
शुभेंदु ने कहा, ‘‘वर्ष 2014 से मार्च 2022 तक, राशि वितरण में अनियमितताएं सामने आने से पहले तक, केंद्र ने पश्चिम बंगाल को 40 लाख आवास योजना लाभार्थियों के लिए 30,000 करोड़ रुपये दिए थे।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में आवास योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं।
उन्होंने कहा कि पिछली राज्य सरकार द्वारा उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) जमा नहीं किए जाने के आरोपों के बाद आवास योजना और कुछ अन्य परियोजनाओं के लिए केंद्र की ओर से मिलने वाली राशि रोक दी गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘राज्य को 30,000 करोड़ रुपये देने के बावजूद पिछली सरकार के दौरान आरोप लगाए गए कि केंद्र उसे वंचित कर रहा है।’’
भाषा अमित नेत्रपाल
नेत्रपाल

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