प्रदर्शनों में बल प्रयोग और पुलिस की भूमिका पर प्रेस क्लब में हुई चर्चा

प्रदर्शनों में बल प्रयोग और पुलिस की भूमिका पर प्रेस क्लब में हुई चर्चा

प्रदर्शनों में बल प्रयोग और पुलिस की भूमिका पर प्रेस क्लब में हुई चर्चा
Modified Date: August 6, 2026 / 11:17 pm IST
Published Date: August 6, 2026 11:17 pm IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) प्रदर्शनों से निपटने के पुलिस के तरीके, कथित अत्यधिक बल प्रयोग और जवाबदेही की जरूरत को लेकर बृहस्पतिवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक परिचर्चा में गंभीर चिंता जताई गई।

वक्ताओं ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों का दायित्व शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को सुगम बनाना है, न कि लोकतांत्रिक असहमति को दबाना।

‘दिल्ली पुलिस एंड सिटिजनरी’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में ‘कॉमन कॉज’ के निदेशक एवं वरिष्ठ पत्रकार विपुल मुद्गल, पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं खुफिया ब्यूरो के सेवानिवृत्त विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद, ‘द वायर’ की संपादक सीमा चिश्ती, आइसा की अखिल भारतीय अध्यक्ष नेहा तथा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में पैलेट गन से घायल इरशाद मंसूर शामिल हुए।

मुद्गल ने कहा कि भारत के लोकतांत्रिक संस्थान दबाव में हैं और पुलिस व्यवस्था को संवैधानिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण ‘‘असभ्य पुलिसिंग’’ के सहारे नहीं किया जा सकता।

मुद्गल ने यह भी कहा कि भीड़ नियंत्रण के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में चरणबद्ध कार्रवाई का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करना है, न कि उन्हें दंडित करना या खदेड़ना।

उन्होंने आरोप लगाया कि पैलेट गन के इस्तेमाल संबंधी एसओपी व्यापक रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

इरशाद मंसूर ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान वह प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही पैलेट गन का शिकार हो गए।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध बल प्रयोग किया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल अप्रत्याशित था।

आइसा अध्यक्ष नेहा ने कहा कि कई पुलिसकर्मी व्यक्तिगत रूप से प्रदर्शनकारियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, लेकिन वे आदेशों के अनुसार कार्रवाई करते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, भगदड़ और निकास मार्ग बंद किए जाने जैसी घटनाएं भीड़ नियंत्रण की निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत थीं।

भाषा

राखी नेत्रपाल

नेत्रपाल


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