उच्च न्यायालय ने पुश्तैनी मकान से बेदखल महिला का कब्जा बहाल किया

उच्च न्यायालय ने पुश्तैनी मकान से बेदखल महिला का कब्जा बहाल किया

उच्च न्यायालय ने पुश्तैनी मकान से बेदखल महिला का कब्जा बहाल किया
Modified Date: January 6, 2026 / 12:33 am IST
Published Date: January 6, 2026 12:33 am IST

प्रयागराज, पांच दिसंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिए एक महत्वपूर्ण निर्णय में पुलिस और राजस्व अधिकारियों की एक संयुक्त टीम द्वारा पुश्तैनी मकान से बेदखल की गई एक महिला का उस घर पर कब्जा बहाल करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की पीठ ने उक्त आदेश पारित करते हुए कहा कि बेदखली का यह आदेश कानूनी प्रक्रिया का घोर उल्लंघन है।

इस तरह के आदेश को गंभीरता से लेते हुए पीठ ने सिद्धार्थ नगर के दीवानी न्यायाधीश के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के लिए इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया। अदालत का मानना है कि दीवानी न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) ने अनुचित जल्दबाजी और सामग्री में अनियमितता के साथ कार्य किया।

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पीठ ने याचिकाकर्ता सोनी और उनके तीन नाबालिग बच्चों को अवैध रूप से बेदखल करने और उन्हें मानसिक पीड़ा देने के लिए प्रतिवादी संख्या आठ (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेशकार) पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि इस प्रतिवादी का मामला उचित कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी के समक्ष रखा जाए।

इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, उक्त मकान का निर्माण याचिकाकर्ता के ससुर ने कराया था और उनके निधन के बाद याचिकाकर्ता के पति और अन्य परिजनों के नाम पर मकान किया गया।

मकान के एक हिस्से में याचिकाकर्ता एक ब्यूटी पार्लर चला रही थी और इस व्यवसाय से आय ही उसकी और उसके परिवार की आजीविका का एकमात्र स्रोत थी।

अदालत के आदेश के अनुसार, प्रतिवादी ने सोनी के पति और उसके छोटे भाई से 14 फरवरी, 2024 को अपने नाम एक बिक्री विलेख हासिल कर लिया।

याचिका में बताया गया कि पेशकार ने यह जानते हुए बिक्री विलेख प्राप्त किया कि मकान का बंटवारा नहीं हुआ है और परिवार के सभी सदस्य उसमें रह रहे हैं।

इसके बाद 13 जनवरी, 2025 को तहसीलदार और पेशकार पुलिस बल के साथ मकान पर पहुंचे और याचिकाकर्ता को मकान खाली करने को कहा जिसका उसने यह कहते हुए विरोध किया कि वह उसका पुश्तैनी मकान है जिसमें वह अपने तीन बच्चों के साथ रह रही है।

जब पेशकार बलपूर्वक कब्जा लेने में विफल रहा तो उसने याचिकाकर्ता, उसके पति श्यामजी और देवर प्रेमजी के खिलाफ मुकदमा दाखिल किया और दावा किया कि उसने बिक्री विलेख के जरिए मकान खरीदा है।

दीवानी न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) के 18 जुलाई 2025 के आदेश पर, भारी पुलिस बल और राजस्व विभाग की एक टीम विवादित संपत्ति पर पहुंची, सोनी को गिरफ्तार किया और उसके तीन बच्चों, जिनकी उम्र आठ, चार और तीन वर्ष है, को पुलिस वाहन में हिरासत में ले लिया।

उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है, ‘हम पाते हैं कि निचली अदालत ने पांच फरवरी, 2025 के आदेश को पारित करने में अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है, और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी प्रतिवादी संख्या आठ को कब्जा सौंपने के लिए राजस्व टीम का गठन करने और उसके बाद याचिकाकर्ता सहित प्रतिवादियों को वाद संपत्ति से बेदखल करने में समान रूप से गलती की है।’

अदालत ने कहा कि यह कृत्य प्रशासनिक शक्तियों का घोर दुरुपयोग है और पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

पीठ ने कहा, ‘मामले की जल्दबाजी से निचली अदालत द्वारा पारित आदेशों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की सत्यनिष्ठा पर गंभीर संदेह पैदा होता है। परिस्थितियां स्पष्ट रूप से प्रशासनिक स्तर पर जांच की आवश्यकता दर्शाती हैं।”

इसी के साथ अदालत ने रिट याचिका निपटारा कर दिया।

भाषा सं राजेंद्र नोमान

नोमान


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