उच्च न्यायालय ने आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर के खिलाफ जांच पर रोक लगाई

उच्च न्यायालय ने आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर के खिलाफ जांच पर रोक लगाई

उच्च न्यायालय ने आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर के खिलाफ जांच पर रोक लगाई
Modified Date: August 22, 2026 / 09:57 pm IST
Published Date: August 22, 2026 9:57 pm IST

प्रयागराज, 22 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आईआईटी कानपुर के एक प्रोफेसर के खिलाफ विशेष अपील लंबित रहने के दौरान कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम और निवारण) (पीओएसएच) कानून के तहत आगे जांच पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर की ओर से दाखिल विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, शिकायतकर्ता छात्रा को कंपन बैंड से जुड़ी एक परियोजना दी गई थी जिसमें कंपन करने वाले बैंड के कार्य और उपयोगिता का अनुसंधान शामिल था।

छात्रा का आरोप है कि ग्रीष्मकालीन अनुसंधान के दौरान इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर ने उसे एक आपत्तिजनक वस्तु उपलब्ध कराई जिसे उसके द्वारा एक ‘सेक्स टॉय’ बताया गया।

प्रोफेसर के वकील के मुताबिक, इस अनुसंधान परियोजना में बिना बोले बातचीत को आसान बनाने के लिए कंपन का अध्ययन शामिल था जिसे ‘कलाई में पहना जा सकने वाला वाइब्रेशन कम्युनिकेशन गैजेट’ बताया गया और इसे सशस्त्र बलों और गुप्त ऑपरेशन के लिए विकसित किया जा रहा था।

उन्होंने दलील दी कि इस उपकरण को कभी भी ‘सेक्स टॉय’ नहीं कहा जा सकता और किसी चीज का संभावित उपयोग, यौन उत्पीड़न की घटना का कारण नहीं हो सकता।

अदालत ने 20 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘इस मामले में विचार करने की जरूरत है। इस अदालत के अगले आदेश और अपील के लंबित रहने तक आगे जांच पर रोक रहेगी।’’

भाषा सं राजेंद्र आशीष

आशीष


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