कर्नाटक के आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ‘लापता’ नहीं : मंत्री

कर्नाटक के आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ‘लापता’ नहीं : मंत्री

कर्नाटक के आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ‘लापता’ नहीं : मंत्री
Modified Date: August 22, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: August 22, 2026 10:09 pm IST

बेंगलुरु, 22 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने शनिवार को स्पष्ट किया कि आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ‘‘लापता’’ नहीं हैं और वह अपने पिता की तबीयत से जुड़ी पारिवारिक आपात स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक स्थान पर हैं।

प्रियंक ने कहा कि गंगवार ने अपनी अनुपस्थिति का हाल में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से मारे गए छापे से कोई संबंध होने से इनकार किया है और जरूरत पड़ने पर वह जांच के लिए तैयार हैं।

इससे पहले दिन में खबरों में कहा गया था कि फिलहाल उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के निदेशक के पद पर कार्यरत गंगवार से 20 अगस्त से सम्पर्क से नहीं है और उन्होंने दिल्ली जाने के लिए विमान का टिकट बुक कराया था।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ गलतफहमी हुई थी। इसका ईडी की छापेमारी से कोई संबंध नहीं है। जब आपने (मीडिया ने) सुबह मुझसे पूछा था, तब हमारे पास ज्यादा जानकारी नहीं थी और मैंने आपको बताया था कि वह (गंगवार) पिछले कुछ दिनों से संपर्क में नहीं हैं।’’

प्रियंक ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि गंगवार के परिवार में आपात स्थिति थी क्योंकि उनके पिता हृदय रोगी हैं। उन्होंने कहा कि पिता की तबीयत खराब होने के कारण अधिकारी को अचानक जाना पड़ा।

खरगे ने कहा, ‘‘उन्होंने (गंगवार) ने संबंधित अधिकारियों को एक पत्र लिखा है। हाथ से लिखे अवकाश पत्र में कहा गया था कि अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण उन्हें एक सप्ताह के लिए अपने पैतृक स्थान जाना है और उन्होंने छुट्टी मांगी थी। चूंकि कल त्योहार था इसलिए सरकार पूरी तरह से काम नहीं कर रही थी और छुट्टी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।’’

मंत्री ने बताया कि गंगवार का आधिकारिक फोन बंद था। उन्होंने कहा कि अधिकारी के पास निजी फोन भी था, लेकिन यात्रा में होने और बाद में अपने पैतृक स्थान पहुंचने के कारण शुरू में उनसे संपर्क नहीं हो सका।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनसे संपर्क किया और उन्होंने हमें बताया कि उन्होंने छुट्टी के लिए आवेदन किया था तथा सरकार को इसकी जानकारी दी थी। पिता की तबीयत से जुड़ी पारिवारिक समस्या के कारण वह ठीक से संपर्क नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि वह कुछ दिनों में लौट आएंगे और उचित तरीके से जानकारी देंगे तथा एक सप्ताह की छुट्टी का अनुरोध किया।’’

प्रियंक ने कहा कि गंगवार के लापता होने और उनकी अनुपस्थिति को केपीएससी में ईडी की छापेमारी से जोड़ने संबंधी खबरें सही नहीं हैं। खरगे ने कहा कि उन्होंने स्वयं अधिकारी से बात की है और वह जल्द लौटेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘परिस्थितियों के कारण इस तरह के निष्कर्ष निकले होंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। हालांकि परिस्थितियां केपीएससी से किसी संबंध का संकेत दे सकती हैं, लेकिन उन्होंने (गंगवार ने) स्पष्ट रूप से कहा है कि एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर वह किसी भी एजेंसी की जांच के लिए तैयार हैं। फिलहाल उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है और न ही किसी ने उनके खिलाफ जांच की मांग को लेकर कोई आवेदन दिया है। यह बात बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए।’’

प्रियंक ने कहा कि गंगवार उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक स्थान गए हैं।

वर्ष 2016 बैच के आईएएस अधिकारी गंगवार इससे पहले केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थे। इस साल मार्च में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था।

इससे पहले दिन में अधिकारियों ने कहा था कि गंगवार की कथित अनुपस्थिति की जांच की जा रही है और उस समय इस बारे में कुछ भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता था। प्रियंक ने कहा था कि सरकार को इस मामले की जानकारी मिली है, लेकिन उनके परिवार या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

मंत्री ने कहा था कि मिली जानकारी के अनुसार, अधिकारी की आखिरी ‘लोकेशन’ केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिली थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को केपीएससी, केपीएससी के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस साहूकार, आयोग सदस्य शांता होसामणि और कुछ अन्य लोगों के परिसरों की तलाशी ली थी। यह कार्रवाई पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में कथित घोटाले से जुड़े धनशोधन जांच के तहत की गई थी।

एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा था कि राज्य मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को केपीएससी के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस साहूकार को निलंबित करने और उनके खिलाफ जांच शुरू करने की सिफारिश राज्यपाल थावरचंद गहलोत से करने का फैसला किया है।

साहूकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। उनकी बेटी का कथित तौर पर फर्जी आय प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए चयन होने के मामले में उन पर भाई-भतीजावाद के भी आरोप हैं।

प्रियंक ने कहा था, ‘‘राज्यपाल ने 13 जुलाई को उन्हें (साहूकार) निलंबित किया था, जिसके खिलाफ वह उच्च न्यायालय गए थे। अदालत ने राज्यपाल से सरकार की सहायता और सलाह के अनुसार फैसला करने को कहा था। मंत्रिमंडल ने कल इस मामले पर चर्चा की। ’’

उन्होंने कहा था कि केपीएससी में भर्ती और उससे जुड़े बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के पूरे प्रकरण पर जनता में चर्चा हो रही है और इससे युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि लोग इस मामले में जवाब मांग रहे हैं और भाजपा की भूमिका तथा केपीएससी अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मंत्री ने कहा, ‘‘लोगों की भावनाओं को समझते हुए हमने राज्यपाल के पहले के निलंबन के फैसले के अनुरूप चलने का निर्णय लिया है और राज्यपाल को इसी आशय की सहायता और सलाह दी है। हमने पूरे मामले की जांच पर भी चर्चा की है। ’’

राज्यपाल ने साहूकार को 13 जुलाई को ‘महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा नहीं करने’ और ‘दुर्व्यवहार’ के आरोपों में निलंबित किया था। हालांकि 18 अगस्त को उच्च न्यायालय ने उन्हें बहाल करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि राज्यपाल का फैसला मंत्रिमंडल की सहायता और सलाह के आधार पर नहीं लिया गया था।

भाषा अमित नमिता

नमिता


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