कोलकाता, 14 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि राज्य में जारी मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से जुड़ी सुनवाई के दौरान अब तक 11,000 से अधिक “अवैध” मतदाताओं की पहचान की गई है, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या नदिया जिले से सामने आई है। वहीं, बांकुड़ा और दक्षिण कोलकाता में कोई अवैध मतदाता नहीं मिला।
राज्य सरकार द्वारा मंगलवार को साझा किए गए इन आंकड़ों पर हालांकि निर्वाचन आयोग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
आयोग राज्य में एसआईआर के तहत उन जगहों पर सुनवाई कर रहा है, जहां मतदाता सूचियों में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं।
राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया में अब तक 9,30,993 मतदाताओं की सुनवाई पूरी हो चुकी है और उनकी जानकारियां ऑनलाइन अपलोड कर दी गई हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इन सुनवाइयों और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद, राज्य सरकार के कर्मचारी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) अब तक 11,472 मतदाताओं को “अवैध” घोषित कर चुके हैं, जिनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से शुरू की गई एसआईआर प्रक्रिया के तहत अब तक पूरे राज्य में 65,78,058 नोटिस तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 32,49,091 नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जिन 9,30,993 मतदाताओं को नोटिस मिला था, उनकी सुनवाई पूरी हो चुकी है और इसी प्रक्रिया में अवैध मतदाताओं की पहचान की गई।
जिला-वार आंकड़ों के मुताबिक, सुनवाई के बाद नदिया में सबसे अधिक 9,228 अवैध मतदाता पाए गए हैं।
इसके विपरीत, दक्षिण कोलकाता और बांकुड़ा में अब तक एक भी अवैध मतदाता नहीं मिला है। दक्षिण कोलकाता में 1,36,561 जबकि बांकुड़ा में 1,63,357 नोटिस जारी किए गए थे।
आंकड़ों के अनुसार, कूचबिहार में अब तक 10, जलपाईगुड़ी में चार, दार्जिलिंग में दो, उत्तर दिनाजपुर में दो और दक्षिण दिनाजपुर में 195 अवैध मतदाता पाए गए हैं।
इसके अलावा मालदा में 15, मुर्शिदाबाद में 68, उत्तर 24 परगना में 147 और दक्षिण 24 परगना में 69 मतदाता अवैध पाए गए।
उत्तर कोलकाता में 54, हावड़ा में 26, हुगली में 989 और पूर्व मेदिनीपुर में दो अवैध मतदाता मिले हैं। पश्चिम मेदिनीपुर में ऐसे 105, पुरुलिया में 44, पूर्व बर्धमान में 167 और बीरभूम में 264 मतदाता चिन्हित किए गए हैं।
पहाड़ी और वन क्षेत्रों वाले जिलों में, अलीपुरद्वार में नौ, कालिम्पोंग में 65, झाड़ग्राम में तीन और पश्चिम बर्धमान में चार अवैध मतदाता पाए गए हैं।
एसआईआर प्रक्रिया राज्य में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। विपक्षी दलों का दावा है कि इससे फर्जी मतदाताओं की पहचान होगी, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़े बहस को और तेज करेंगे, क्योंकि अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने पर अवैध मतदाताओं की संख्या में कोई बदलाव होता है या नहीं।
ये आंकड़े एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच सामने आए हैं।
एसआईआर के पहले चरण के पूरा होने के बाद 16 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई, यानी पूरे राज्य में 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए।
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में नाम हटाने के कारणों में मृत्यु, स्थायी पलायन, दोहराव और गणना फॉर्म जमा न करना शामिल था।
एसआईआर का दूसरा चरण फिलहाल जारी है, जिसमें 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई हो रही है। इनमें 1.36 करोड़ मतदाता तार्किक विसंगतियों के कारण जांच के दायरे में हैं और लगभग 31 लाख ऐसे मतदाता हैं, जिनके रिकॉर्ड की सही ढंग से मैपिंग नहीं हो पाई है।
भाषा जोहेब मनीषा
मनीषा