हिमाचल के राज्यपाल ने दो मिनट में खत्म किया अभिभाषण, ‘संवैधानिक संस्था’ से जुड़ा अंश नहीं पढ़ा

हिमाचल के राज्यपाल ने दो मिनट में खत्म किया अभिभाषण, ‘संवैधानिक संस्था’ से जुड़ा अंश नहीं पढ़ा

हिमाचल के राज्यपाल ने दो मिनट में खत्म किया अभिभाषण, ‘संवैधानिक संस्था’ से जुड़ा अंश नहीं पढ़ा
Modified Date: February 16, 2026 / 09:52 pm IST
Published Date: February 16, 2026 9:52 pm IST

शिमला, 16 फरवरी (भाषा) हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने एक असमान्य कदम उठाते हुए, सोमवार को राज्य विधानसभा में अपना अभिभाषण मात्र दो मिनट 10 सेकंड में समाप्त कर दिया और इसके एक अंश को ‘‘संवैधानिक संस्था पर टिप्पणी’’ करार देते हुए नहीं पढ़ा।

यह घटना तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में राज्यपालों और वहां की गैर-भाजपा सरकारों के बीच जारी गतिरोध की श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है।

अपने भाषण के पहले दो पैराग्राफ पढ़ने के बाद, राज्यपाल ने कहा कि वह 130 पैराग्राफ के मूलपाठ के तीसरे से 16वें पैराग्राफ तक नहीं पढ़ेंगे।

राज्यपाल ने सदन को बताया, ‘‘मुझे लगता है कि तीसरे से 16वें पैराग्राफ तक संवैधानिक संस्था पर टिप्पणियां हैं और मुझे नहीं लगता कि मुझे उन्हें पढ़ना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि 17वें पैराग्राफ से आगे के भाषण में सरकार की उपलब्धियां शामिल हैं, जिन पर सदन में चर्चा होगी।

यह पहली बार नहीं है, जब हिमाचल प्रदेश में किसी राज्यपाल ने पूरा अभिभाषण नहीं पढ़ा या इससे दूरी बनाई हो। वर्ष 2015 में, हिमाचल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे कल्याण सिंह ने स्वास्थ्य कारणों से अभिभाषण नहीं पढ़ा था और अनुरोध किया था कि इसे पढ़ा हुआ मान लिया जाए।

इससे पहले, राज्यपाल ने सदन को सूचित किया कि यह सत्र वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान संबंधी पूरक मांगों को पारित करने, वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को पारित करने और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के लिए है।

अभिभाषण के नहीं पढ़े गये अंश में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 2024 में राज्य विधानसभा में अब तक का सबसे संक्षिप्त नीतिगत अभिभाषण दिया, जो एक मिनट से थोड़ा अधिक समय तक चला और इसमें केंद्र सरकार की आलोचना करने वाले अंशों को छोड़ दिया गया था।

उसी वर्ष, कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने अभिभाषण की केवल पहली और आखिरी पंक्तियां पढ़ी थीं।

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने कहा कि राज्यपाल का निर्णय ‘‘कोई अपवाद नहीं’’ है, और उन्होंने पहले के उन उदाहरणों का हवाला दिया, जिनमें राज्यपालों ने राज्य सरकारों द्वारा तैयार किये गए अभिभाषण से अलग बातें कही थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘आरडीजी हमारा अधिकार है। हम किसी प्रकार की भीख नहीं मांग रहे हैं, क्योंकि हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय राज्य है, जहां प्राकृतिक संसाधनों और भौगोलिक सीमाओं के कारण राजस्व सृजन स्वाभाविक रूप से सीमित है।’’

विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्यपाल का महज दो मिनट में अपना अभिभाषण समाप्त करना ‘‘अच्छा संकेत नहीं’’ है।

खबरों के मुताबिक, उनके अभिभाषण में आरडीजी को बंद करने को छोटे और पर्वतीय राज्यों के लिए ‘‘गंभीर चिंता’’ का विषय बताया गया और कहा गया कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को ‘‘भारी नुकसान’’ होगा।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में