लद्दाख की मांगों को लेकर केंद्र से ‘सार्थक संवाद’ की उम्मीद : वांगचुक

लद्दाख की मांगों को लेकर केंद्र से ‘सार्थक संवाद’ की उम्मीद : वांगचुक

लद्दाख की मांगों को लेकर केंद्र से ‘सार्थक संवाद’  की उम्मीद : वांगचुक
Modified Date: March 17, 2026 / 09:28 pm IST
Published Date: March 17, 2026 9:28 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल से रिहा होने के बाद पहली सार्वजनिक टिप्पणी में मंगलवार को कहा वह इस घटनाक्रम को ‘सकारात्मक रूप से’ देखना चाहते हैं और आशा करते हैं कि इससे लद्दाख में आंदोलनकारी संगठनों की मांगों पर ‘सार्थक संवाद’ होगा।

वांगचुक ने पत्नी और एचआईएएल की सह-संस्थापक गीतांजलि जे अंगमो के साथ यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि लद्दाख में विरोध प्रदर्शन का एकमात्र उद्देश्य रचनात्मक संवाद प्रक्रिया शुरू करना है।

जलवायु कार्यकर्ता ने कहा कि बातचीत एक ‘समन्वय की प्रक्रिया’ है और दोनों पक्षों को ‘कुछ रियायतें’देनी होंगी। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अदालत में जीत का पूरा भरोसा था, लेकिन जीत ही काफी नहीं थी। मैं एक ऐसा समाधान चाहता हूं जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो।’’

वांगचुक ने उम्मीद भी जताई कि उच्चतम न्यायालय उनकी पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर फैसला सुनाकर एक मिसाल कायम करेगा।

वांगचुक ने सरकार द्वारा रिहा करने की पहल को ‘‘विश्वास कायम करने और सार्थक, रचनात्मक संवाद को सुविधाजनक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम’’ करार दिया।

जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘उन्होंने रचनात्मक और सार्थक संवाद का प्रस्ताव रखा है। यही हम चाहते थे, और इसके लिए हमें बहुत संघर्ष करना पड़ा, दिल्ली तक पदयात्रा करनी पड़ी, अनशन पर बैठना पड़ा। लद्दाख में सभी आंदोलन संवाद प्रक्रिया शुरू करने के लिए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आमतौर पर लोग हथियार उठाते हैं और सरकार बातचीत की अपील करती है। यहां लोग सरकार से बातचीत शुरू करने का आग्रह कर रहे हैं।’’

वांगचुक ने उम्मीद जताई की कि यह महज एक संवाद नहीं होगा, बल्कि ‘‘सार्थक, प्रभावी बातचीत होगी, जो हमें किसी अच्छे परिणाम की ओर ले जाएगी’’।

जलवायु कार्यकर्ता ने लद्दाख में हुई घटनाओं के बारे में कहा कि कई ‘बेवजह गिरफ्तारियां’ हुईं। उन्होंने दावा किया, ‘‘यहां तक ​​कि जो लोग रक्तदान करने जा रहे थे, उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया और उनके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई। ऐसी घटनाएं हुई हैं।’’

वांगचुक ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि हिंसा कैसे शुरू हुई। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों के बीच ऐसी आवाजें भी उठ रही हैं जो पूछती हैं – यह सब कहां से शुरू हुआ? यह हिंसा कैसे शुरू हुई? दरअसल, इसकी जांच होनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग पूछते हैं कि इतने सारे लोगों की सीने में चोट लगने से मौत कैसे हुई? लेकिन मुझे लगता है कि यह सब ठीक हो सकता है। लोग अपने संदेह और शंकाओं को दूर कर सकते हैं और सरकार अपने मामले वापस ले सकती है।’’

वांगचुक से अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह लद्दाख की यात्रा करेंगे और लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केएडी) के नेताओं से परामर्श करेंगे, जो पिछले पांच वर्षों से राज्य का दर्जा और लद्दाख को छठी अनुसूची का विस्तार देने के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।

नए सिरे से आंदोलन शुरू करने के सवाल पर जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘मैंने हमेशा कहा है कि मैं भूख हड़ताल पर नहीं बैठना चाहता। मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, अब जबकि सरकार ने पहल की है, हमें उम्मीद है कि इससे एक अच्छा उदाहरण पेश होगा।’’

उन्होंने कहा कि जब केंद्र के साथ बातचीत हो, तो दोनों पक्षों को लचीला और सहयोगात्मक होना चाहिए।

वांगचुक ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर, दो मुख्य मुद्दे छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपाय, राज्य का दर्जा या लोकतंत्र की बहाली हैं… जैसा कि मैंने कहा, इसमें लचीला रुख अपनाया जा सकता है। इसलिए, यदि दोनों पर नहीं, तो हम एक पर सहमति की उम्मीद करेंगे… राष्ट्र निर्माण के हित में हम इसी तरह समन्वय करने और लचीला रुख अपनाने की उम्मीद करते हैं।’’

जलवायु कार्यकर्ता ने हालांकि स्पष्ट किया कि लद्दाख के नेता ही इस संबंध में निर्णय लेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन निश्चित रूप से, यह किसी एक पक्ष के लिए हार-जीत की स्थिति नहीं होनी चाहिए… इससे सफल संवाद नहीं हो सकता। यह एक ऐसी स्थिति हो सकती है जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे का सहयोग करें।’’

जलवायु कार्यकर्ता ने कहा कि उन्होंने जोधपुर जेल में अपना समय ध्यान लगाने में बिताया। उन्होंने जेल कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि भले ही वे बाहर नहीं निकल सकते थे, लेकिन उन्हें जोधपुर की ‘गर्मजोशी’ का एहसास हुआ।

वांगचुक (59) को पिछले साल 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था। उन्हें लद्दाख में आंदोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद हिरासत में लिया गया था। उक्त हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी।

केंद्र सरकार द्वारा वांगचुक की नजरबंदी को तत्काल प्रभाव से रद्द किये जाने के बाद उन्हें शनिवार को जोधपुर केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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