‘मैं किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक ज़िंदा रहूंगा’: वांगचुक
‘मैं किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक ज़िंदा रहूंगा’: वांगचुक
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को कहा कि वह “किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक जीवित रहेंगे”। उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज 20वां दिन है और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय से चल रहा उनका उपवास अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है।
परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) का विरोध प्रदर्शन 28वें दिन में प्रवेश कर गया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आज वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।
प्रदर्शन स्थल पर समर्थकों को संबोधित करते हुए वांगचुक ने अपनी बिगड़ती शारीरिक स्थिति को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि उनका संकल्प अडिग है।
उन्होंने कहा, “मैं बाहर से कमजोर हूं, लेकिन अंदर से बहुत मजबूत हूं। मुझे यकीन है कि आप सभी अंदर और बाहर, दोनों तरह से मजबूत हैं। हमें 20 जुलाई के लिए इस ऊर्जा की ज़रूरत है, जब हम संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे। हम सब मिलकर लोकतंत्र के मंदिर में अपनी बात रखेंगे।”
उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, “मैं किसी भी हाल में 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा। अगर आप नहीं आए और 20 जुलाई का प्रदर्शन सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।” उनकी इस बात पर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।
पिछले 24 घंटों में वांगचुक का वजन 350 ग्राम और कम हो गया, जिससे उनका कुल वजन लगभग 9.5 किलोग्राम कम हो गया है।
उनकी देखभाल कर रहे चिकित्सकों के दल की ओर से जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक का वजन अब 56.55 किलोग्राम है। उनका रक्तचाप 108/68 एमएमएचजी, रक्त शर्करा 80 एमजी/डीएल, पल्स रेट 72 प्रति मिनट और ऑक्सीजन संतृप्तता 96 प्रतिशत दर्ज की गयी।
डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार को चेतावनी दी थी कि लंबे समय तक उपवास के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई है और अगर भूख हड़ताल जारी रही, तो अगला चरण चिंताजनक हो सकता है और अंगों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
वांगचुक ने हालांकि, उपवास खत्म करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया मिले बिना इसे खत्म करने से गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि अब पूरा ध्यान 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च को सफल बनाने पर होना चाहिए।
यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय भी पहुंच गया है, जिसने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे वांगचुक की सेहत पर रोज नजर रखें और अगर उनकी हालत बिगड़ती है, तो उन्हें चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं।
भूख हड़ताल कर रहे अन्य लोगों की हालत भी बिगड़ रही है। भाकपा (माले) लिबरेशन से संबद्ध ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने कहा कि उसके सदस्य नेहा, मनीष और आमीन की हालत “गंभीर” हो गई है। ये तीनों भी प्रदर्शन स्थल पर एक अलग मंच पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
एक बयान में आइसा ने कहा कि निर्जलीकरण की वजह से आमीन को ‘हाइपोवोलेमिक शॉक’ का खतरा था, नेहा का रक्त शर्करा स्तर खतरनाक रूप से गिरकर 49 एमजी/डीएल हो गया था और मनीष का वजन उसके शरीर के कुल वजन का 10 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया था।
संगठन ने कहा कि छात्र तब तक सोनम वांगचुक के साथ एकजुटता बनाए रखने के लिए दृढ़ हैं।
कॉजपा के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलना जारी है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पर वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।
खेड़ा का यह दौरा समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव के भूख हड़ताल कर रहे लोगों से मिलने और केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील करने के एक दिन बाद हुआ। साथ ही, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी वांगचुक की सेहत पर चिंता जताई और संसद तक प्रस्तावित मार्च के लिए अपना समर्थन दिया।
पिछले सप्ताह के दौरान, आंदोलन को अभिनेता प्रकाश राज का भी समर्थन मिला है। इनके अलावा दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी; तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष; माकपा सांसद अमरा राम; वरिष्ठ माकपा नेता सुभाषिनी अली; केरल के पूर्व मंत्रियों केके शैलजा, थॉमस इसाक, के.एन. बालगोपाल और पी राजीव; त्रिपुरा के नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी; समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज और प्रिया सरोज; शिवसेना (उबाठा) सांसद अरविंद सावंत; राकांपा विधायक रोहित पवार; और भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी समर्थन व्यक्त करने वालों में शामिल हैं।
लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह, अर्थशास्त्री जयंती घोष और कई शिक्षाविदों समेत जाने-माने नागरिकों के एक समूह ने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया है और साथ ही वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की है।
कॉजपा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग कर रही है।
संगठन ने मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का आह्वान किया है।
कॉजपा का विरोध प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ, जबकि वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
भाषा प्रशांत वैभव
वैभव

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