आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ‘धोखाधड़ी’ मामले में ईडी ने पांच शहरों में छापेमारी के बाद 90 खाते फ्रीज किए

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ‘धोखाधड़ी’ मामले में ईडी ने पांच शहरों में छापेमारी के बाद 90 खाते फ्रीज किए

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ‘धोखाधड़ी’ मामले में ईडी ने पांच शहरों में छापेमारी के बाद 90 खाते फ्रीज किए
Modified Date: March 13, 2026 / 05:27 pm IST
Published Date: March 13, 2026 5:27 pm IST

नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बताया कि उसने हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े धनशोधन मामले में 90 बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। इस मामले में कथित रूप से हरियाणा सरकार के 590 करोड़ रुपये की धनराशि गबन की गई है।

संघीय जांच एजेंसी ने दावा किया कि केवल कागज पर चल रही (शेल) कंपनियों का इस्तेमाल और सोने की खरीद के लिए फर्जी बिलिंग के जरिये यह धोखाधड़ी की गयी।

प्रवर्तन निदेशालय ने 11 मार्च को चंडीगढ़ ट्राइसिटी (पंजाब में चंडीगढ़ और मोहाली तथा हरियाणा में पंचकुला), गुरुग्राम (हरियाणा) और बेंगलुरु (कर्नाटक) में कुल 19 स्थानों पर छापेमारी की।

ईडी ने एक बयान में कहा कि यह पाया गया कि आरोपी ने सार्वजनिक धन का गबन कई शेल कंपनियों के माध्यम से धन को इधर-उधर भेजकर और कई स्तर पर बांटकर किया।

निदेशालय ने कहा कि अधिकांश धनराशि ज्वैलर्स के बैंक खातों के माध्यम से भेजी गई, ताकि फर्जी बिलिंग के जरिये सोने की खरीद का भ्रम पैदा किया जा सके।

ईडी ने मामले में शामिल एक शेल कंपनी की पहचान स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. के रूप में की, जिसके साझेदार स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला हैं।

निदेशालय ने कहा कि यह घोटाला पिछले वर्ष बैंक के पूर्व कर्मचारियों की सहायता से अंजाम दिया गया, जिनमें ऋभव ऋषि शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, ‘‘अपराध से प्राप्त धन’’ ऋषि और उनकी पत्नी दिव्या अरोड़ा के खातों में खर्च या स्थानांतरित कर दिया गया।

ईडी ने कहा, ‘‘छापेमारी के दौरान 90 से अधिक बैंक खाते फ्रीज किए गए और डिजिटल तथा दस्तावेज़ी साक्ष्यों के रूप में अभियोजन के लिए आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई।’’

इस छापेमारी से पहले, एजेंसी ने हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो की प्राथमिकी को ध्यान में रखते हुए धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था।

ब्यूरो के अनुसार, इस जांच के तहत अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें छह बैंक कर्मचारी, चार निजी व्यक्ति और एक सरकारी अधिकारी शामिल हैं।

भाषा

सुरेश मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में