40 करोड़ देशवासी आजादी दिला सकते हैं तो 140 करोड़ ‘परिवारजन’ समृद्ध भारत भी बना सकते हैं: मोदी

40 करोड़ देशवासी आजादी दिला सकते हैं तो 140 करोड़ ‘परिवारजन’ समृद्ध भारत भी बना सकते हैं: मोदी

40 करोड़ देशवासी आजादी दिला सकते हैं तो 140 करोड़ ‘परिवारजन’ समृद्ध भारत भी बना सकते हैं: मोदी
Modified Date: August 15, 2024 / 08:16 am IST
Published Date: August 15, 2024 8:16 am IST

नयी दिल्ली, 15 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि जब 40 करोड़ देशवासी गुलामी की जंजीरों को तोड़कर देश को आजाद कर सकते हैं तो आज 140 करोड़ ‘परिवारजन’ इसी भाव से समृद्ध भारत भी बना सकते हैं।

78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ सिर्फ भाषण के शब्द नहीं हैं बल्कि इसके पीछे कठोर परिश्रम जारी है और देश के सामन्य जन से सुझाव लिए जा रहे हैं।

इससे पहले, प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लगातार 11वीं बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

स्वतंत्रता दिवस पर, अपने तीसरे कार्यकाल के पहले संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पीछे छोड़ दिया। मनमोहन सिंह ने 2004 से 2014 के दौरान लाल किले की प्राचीर से 10 बार तिरंगा फहराया था।

इस मामले में मोदी पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। नेहरू को यह सम्मान 17 बार और इंदिरा को 16 बार मिला था।

आजादी के आंदोलन में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता की सांस लेने का सौभाग्य दिया है और यह देश उनका ऋणी रहेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘आज तो हम 140 करोड़ हैं। अगर 40 करोड़ देशवासी गुलामी की जंजीरों को तोड़ सकते हैं, आजादी के सपने को पूर्ण कर सकते हैं, आजादी लेकर दिखा सकते हैं तो 140 करोड़ देशवासी, 140 करोड़ मेरे परिवारजन अगर संकल्प लेकर चल पड़ते हैं, एक दिशा निर्धारित करके चल पड़ते हैं, कदम से कदम मिलाकर और कंधे से कंधा मिलाकर अगर चल पड़ते हैं तो चुनौतियां कितनी भी क्यों ना हो, अभाव कितना भी तीव्र क्यों ना हो, संसाधनों के लिए जूझने की नौबत क्यों न हो तो भी… हर चुनौती को पार करते हुए हम समृद्ध भारत बना सकते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। अगर 40 करोड़ देशवासी अपने पुरुषार्थ, समर्पण, त्याग और बलिदान से आजादी दिला सकते हैं, आजाद भारत बना सकते हैं तो 140 करोड़ देशवासी इसी भाव से समृद्ध भारत भी बना सकते हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह समय है देश के लिए जीने की प्रतिबद्धता का और अगर देश के लिए मरने की प्रतिबद्धता आजादी दिला सकती है तो देश के लिए जीने की प्रतिबद्धता समृद्ध भारत भी बना सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘विकसित भारत 2047 सिर्फ भाषण के शब्द नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे कठोर परिश्रम चल रहा है। देश के कोटि-कोटि जनों के सुझाव लिए जा रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि देश के करोड़ों नागरिकों ने विकसित भारत के लिए अनगिनत सुझाव दिए हैं और इसमें हर देशवासी का सपना उसमें प्रतिबिंबित हो रहा है, हर देशवासी का संकल्प झलकता है।

उन्होंने कहा कि किसी ने भारत को दुनिया का ‘स्किल कैपिटल’ बनाने का सुझाव दिया तो किसी ने भारत को विनिर्माण के क्षेत्र में दुनिया का केंद्र बनाने का और किसी ने यहां के विश्वविद्यालयों को वैश्विक बनाने का सुझाव दिया।

मोदी ने कहा कि किसी ने बढ़ती हुई प्राकृतिक आपदाओं के बीच शासन प्रशासन में क्षमता निर्माण का सुझाव दिया तो बहुत सारे लोगों ने यह सपना भी देखा है कि अंतरिक्ष में भारत का ‘स्पेस स्टेशन’ जल्द से जल्द बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने लाल किले पर तिरंगा फहराने से पहले राजघाट जा कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।

लाल किला पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने किया।

भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र मनीषा

मनीषा


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