यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों का सम्मान नहीं किया जाता, तो चुनाव का क्या मतलब है: चौधरी

यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों का सम्मान नहीं किया जाता, तो चुनाव का क्या मतलब है: चौधरी

यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों का सम्मान नहीं किया जाता, तो चुनाव का क्या मतलब है: चौधरी
Modified Date: August 22, 2026 / 09:17 pm IST
Published Date: August 22, 2026 9:17 pm IST

जम्मू, 22 अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने शनिवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेतृत्व वाली सरकार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में देरी कर रही है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक ऐसा प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचा होना चाहिए, जिसमें चुने हुए प्रतिनिधि वास्तव में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकें।

केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आज यह उमर अब्दुल्ला की सरकार है, लेकिन हमारे पास न तो पुलिस है और न ही हमारा अपना आईपीएस या आईएएस कैडर है। तो यह किस तरह की सरकार है?’’

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नेकां सरकार नहीं चाहेगी कि पंयाचती राज संस्थाओं के चुनाव सिर्फ इसलिए हों कि चुने हुए प्रतिनिधियों को ‘बाद में नजरअंदाज किया जाए, उन्हें सम्मान ना दिए जाए और अधिकारी उन्हें मान्यता तक न दें।

वह भाजपा के उस आरोप का जवाब दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि नेकां के नेतृत्व वाली सरकार जानबूझकर पंचायत और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव में देरी कर रही है।

चौधरी ने कहा, ‘‘हमने कभी नहीं कहा कि हम चुनाव नहीं चाहते। हमने कहा है कि हमें राज्य का दर्जा दें। वे (भाजपा नीत सरकार) हमसे कहते हैं कि सही समय पर यह दिया जाएगा।’’

इससे पहले, सरकार ने कहा था कि स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की प्रक्रिया चल रही है और मतदाता सूची, आरक्षण और परिसीमन जैसी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चुनाव कराए जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘आज अगर हम किसी को सरपंच या डीडीसी (जिला विकास परिषद) सदस्य बनाते हैं, तो क्या अधिकारी वास्तव में उनकी बात सुनेंगे?’’ उन्होंने पूछा कि इस तरह के चुनाव कराने का क्या तुक है।

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में