भेदभाव के प्रति आईआईटी की बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए: प्रधान

भेदभाव के प्रति आईआईटी की बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए: प्रधान

भेदभाव के प्रति आईआईटी की बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए: प्रधान
Modified Date: April 18, 2023 / 09:28 pm IST
Published Date: April 18, 2023 9:28 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) का सभी प्रकार के भेदभाव के प्रति बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए और छात्रों को पर्याप्त सहायता मुहैया करायी जानी चाहिए।

प्रधान ने सभी 23 प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों की शीर्ष समन्वय निकाय आईआईटी काउंसिल की बैठक में यह भी कहा कि संस्थानों के छात्रों को नए भारत का चेहरा होना चाहिए और वैश्विक नागरिक बनने के लिए तैयार रहना चाहिए।

परिषद ने आईआईटी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कई कदमों पर चर्चा की।

इसमें एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग सेवाओं को बढ़ाने, दबाव कम करने और छात्रों के बीच विफलता और अस्वीकृति के डर को कम करने के महत्व पर प्रकाश डालने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

परिषद में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों से संबंधित छात्रों के लिए समर्थन बढ़ाने पर सहमति जतायी गई।

इसने पीएचडी छात्राओं को सहायता की अवधि एक अतिरिक्त वर्ष के लिए बढ़ाने का भी संकल्प लिया।

दो साल के अंतराल के बाद आयोजित आईआईटी परिषद की 55 वीं बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पिछली बैठक महामारी को देखते हुए फरवरी 2021 में डिजिटल तरीके से आयोजित की गई थी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में यह आईआईटी परिषद की पहली बैठक भी है।

परिषद आईआईटी में प्रशासनिक और अन्य प्रमुख मामलों की देखभाल करती है। इसमें सभी 23 आईआईटी के निदेशक और अध्यक्ष शामिल होते हैं।

भाषा अमित माधव

माधव


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